महाराष्ट्र विधान परिषद निवृत्ति 2026 (डिजाइन फोटो)
Devendra Fadnavis on Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र विधान परिषद के 9 सदस्यों का कार्यकाल आगामी 13 मई को समाप्त हो रहा है। इस उपलक्ष्य में मंगलवार को सदन में विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की कड़वाहट दरकिनार कर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और यादों का सिलसिला देखने को मिला।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपने भाषणों से सदन का माहौल भावुक और गरिमामय बना दिया। इन सभी का चुनाव 14 मई 2020 को हुआ था।
महाराष्ट्र सदस्यों के विधान परिषद से रिटायर हो रहे विदाई समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे की जमकर सराहना की। सीएम फडणवीस ने पूर्व सीएम ठाकरे को प्रसिद्ध साहित्यकार पु. ल. देशपांडे की ‘कोट्याधीश’ (हाजिर जवाब) की उपाधि देते हुए कहा कि ठाकरे के बोलने में एक विशेष प्रकार का विनोद और सहजता होती है।
सीएम फडणवीस ने कहा, ‘ठाकरे का व्यक्तित्व मूलतः एक राजनेता का नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कलाकार का है। एक बेहतरीन फोटोग्राफर के रूप में उन्होंने महाराष्ट्र की संस्कृति और किलों को अपने कैमरे में कैद किया है।’ फडणवीस ने यह भी जोड़ा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सह-यात्री के रूप में हमारा रिश्ता पुराना और गहरा है।
शिवसेना में फूट के बाद पहली बार उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सुर उद्धव ठाकरे के प्रति बेहद नरम दिखाई दिए। विदाई प्रस्ताव रखते हुए शिंदे ने बार-बार ‘उद्धव ठाकरे साहेब’ कहकर उन्हें संबोधित किया। शिंदे ने कहा, ‘आज हम एक भावुक मोड़ पर खड़े हैं। राजनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं होता। ठाकरे का कार्यकाल भले ही समाप्त हो रहा हो, लेकिन जनसेवा का उनका कार्य निरंतर जारी रहेगा।’ शिंदे ने ठाकरे के स्वस्थ और दीर्घायु होने की कामना करते हुए उन्हें भावो राजनीतिक यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।
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अपने विदाई भाषण में उद्धव ठाकरे ने फडणवीस और शिंदे की प्रशंसा का जवाब देते हुए एक चुटकी भी ली। फडणवीस द्वारा उन्हें ‘करीबी मित्र’ और ‘संवेदनशील कलाकार’ बताने पर ठाकरे ने शायराना अंदाज में सवाल किया, ‘यदि आप मुझे इतना करीब से जानते थे और मेरा स्वभाव इतना ही अच्छा था, तो फिर ऐसी कौन-सी बात हो गई कि आपको (शिंदे का) हाथ पकड़कर आगे चलना पड़ा?’
ठाकरे ने अपने मुख्यमंत्री काल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी इस पद का मोह नहीं किया। उन्होंने धारावी मॉडल, किसान कर्जमाफी, शिवभोजन थाली और औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर करने जैसे निर्णयों का जिक्र करते हुए प्रशासन और सहयोगियों का आभार माना। इसके साथ साथ उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष, ‘विरोधी दल नेता की नियुक्ति, युवा शक्ति को बढ़ावा और बाबागिरी पर अंकुश ऐसी तीन मांगें भी रखी।