महाराष्ट्र MLC चुनाव: अपनों की बगावत से महायुति में खलबली, 17 सीटों पर नामांकन के आखिरी दिन बढ़ा सियासी पारा
Maharashtra MLC Election 2026: महाराष्ट्र विधान परिषद की 17 सीटों के लिए नामांकन के आखिरी दिन महायुति और महाविकास आघाड़ी में टिकटों को लेकर घमासान और कई सीटों पर बगावत देखने को मिली।
- Written By: आकाश मसने
सुनेत्रा पवार, देवेंद्र फडणवीस व एकनाथ शिंदे (डिजाइन फोटो)
Maharashtra Vidhan Parishad Chunav: महाराष्ट्र विधान परिषद की 17 स्थानीय स्वराज्य संस्था सीटों के लिए नामांकन के अंतिम दिन राजनीतिक घटनाक्रमों ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया। महायुति और महाविकास आघाड़ी दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है। एक ओर पुणे में एनसीपी ने विक्रम काकड़े को उम्मीदवार बनाकर नया राजनीतिक समीकरण खड़ा किया है, वहीं छत्रपति संभाजीनगर-जालना सीट पर शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार के बेटे समीर सत्तार के नामांकन ने महायुति में संभावित बगावत की चर्चाओं को हवा दे दी है।
पुणे में NCP विक्रम काकड़े को मिला टिकट
पुणे स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद सीट से महायुति की ओर से राकां के उम्मीदवार विक्रम काकड़े ने नामांकन दाखिल किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल, विप की उपसभापति नीलम गोरहे, विधायक दिलीप वलसे पाटिल और राष्ट्रवादी नेता जय पवार मौजूद रहे। विक्रम काकड़े की उम्मीदवारी को लेकर पार्टी के भीतर नाराजगी भी सामने आई। पूर्व विधायक विलास लांडे ने आरोप लगाया कि आर्थिक रूप से मजबूत होने के कारण काकड़े को टिकट दिया गया है, जबकि पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई।
विक्रम काकड़े और सुनील टिंगरे में अंतिम समय तक रहा सस्पेंस
नामांकन से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में काफी राजनीतिक उठापटक देखने को मिली। विक्रम काकड़े और पूर्व विधायक सुनील टिंगरे दोनों के नामों की चर्चा थी। दोनों नेताओं द्वारा नामांकन दाखिल किए जाने से उम्मीदवार को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने विक्रम काकड़े को अधिकृत उम्मीदवार घोषित कर दिया। काकड़े ने हाल ही में एनसीपी में प्रवेश किया है। उनके साथ पूर्व सांसद संजय काकड़े ने भी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
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संभाजीनगर में समीर सत्तार की बगावत
छत्रपति संभाजीनगर-जालना विधान परिषद सीट पर महायुति के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई है। सीट भाजपा के खाते में जाने के बावजूद शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार के बेटे समीर सत्तार ने नामांकन दाखिल कर दिया है। इस पर अब्दुल सत्तार ने कहा कि लगातार उनके प्रभाव वाले स्थानीय निकायों और राजनीतिक क्षेत्रों को उनसे छीना जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कार्यकर्ताओं की भावनाओं को नजरअंदाज किया गया तो भविष्य में गंभीर राजनीतिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
चंद्रपुर में शैलेश अग्रवाल मैदान में
चंद्रपुर-वर्धा क्षेत्र से महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार शैलेश अग्रवाल ने नामांकन दाखिल किया। इस अवसर पर विजय वडेट्टीवार, सांसद प्रतिभा धानोरकर, रणजीत कांबले सहित कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) और राष्ट्रवादी (शरद गुट) के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
ठाणे में फाटक बनाम पवार
ठाणे सीट पर शिवसेना (शिंदे गुट) के उम्मीदवार रविंद्र फाटक ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शक्ति प्रदर्शन करते हुए नामांकन दाखिल किया। वहीं महाविकास आघाड़ी की ओर से राष्ट्रवादी (शरद गुट) के अभिजीत पवार ने भी अपना पर्चा दाखिल किया।
यवतमाल में महायुति के लिए नई मुश्किल
यवतमाल सीट शिवसेना के खाते में गई है, जहां पार्टी ने दुष्यंत चतुर्वेदी को उम्मीदवार बनाया है। लेकिन भाजपा नेता नितीन भुतडा ने बगावती तेवर दिखाते हुए निर्दलीय नामांकन भर दिया है। इससे महायुति के लिए नई चुनौती खड़ी हो गई है।
विप्लव बाजोरिया काे हिंगोली-परभणी ने मिला टिकट
परभणी-हिंगोली सीट पर शिवसेना ने सईद खान को उम्मीदवार बनाया है। टिकट की दौड़ में आगे माने जा रहे पूर्व विधायक विप्लव बाजोरिया का नाम कटने से स्थानीय स्तर पर असंतोष की चर्चा शुरू हो गई है। इस बीच विप्लव बाजोरिया ने अमरावती से निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया है।
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भाजपा का बढ़ा राजनीतिक दायरा
पिछले चुनाव में 17 में से 8 सीटों पर भाजपा का कब्जा था, जबकि इस बार पार्टी 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण अहिलयानगर, सांगली-सातारा और नांदेड़ जैसी सीटें भाजपा के हिस्से में आई हैं। वहीं शिवसेना का कोटा पांच से घटकर चार सीटों पर आ गया है। महायुति के तीनों दलों ने आपसी तालमेल से सीटों का गणित साधा है। एनसीपी ने पुणे सीट अपने पास रखी, जबकि परभणी-हिंगोली सीट शिवसेना को दे दी गई। इसके बदले रायगड़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग सीट राष्ट्रवादी के खाते में आई। इस समझौते ने गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अब नामांकन वापसी की प्रक्रिया पर टिकी नजर
अब नामांकन वापसी की प्रक्रिया और संभावित बगावतों पर सबकी नजरें टिकी हैं। खासकर संभाजीनगर, यवतमाल, पुणे और हिंगोली की सीटें आने वाले दिनों में महायुति और महाविकास आघाड़ी दोनों के लिए राजनीतिक परीक्षा साबित हो सकती हैं।
