

Mahayuti Mahamandals Allocation Formula: महाराष्ट्र की राजनीति से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। महायुति सरकार में लंबे समय से लंबित पड़े विभिन्न महामंडलों और सरकारी संस्थाओं में नियुक्तियों को लेकर आखिरकार बड़ी हलचल शुरू हो गई है। भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच महामंडलों के बंटवारे का फॉर्मूला तय हो गया है। इसके बाद जल्द ही अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियों की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है।
महायुति सरकार के गठन के कई महीने बीत जाने के बावजूद विभिन्न महामंडलों में नियुक्तियां नहीं हो सकी थीं। इससे इच्छुक नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही थी। अब बंटवारे का फॉर्मूला तय होने की खबर सामने आने के बाद कार्यकर्ताओं में उत्सुकता बढ़ गई है।
सूत्रों के मुताबिक, महायुति में दलों की राजनीतिक ताकत और संख्या बल को ध्यान में रखते हुए हिस्सेदारी तय की गई है। इसके अनुसार भाजपा को महामंडलों और विभिन्न पदों में सबसे अधिक 48 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 29 प्रतिशत, जबकि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 22 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलने की जानकारी सामने आई है। वहीं महायुति के अन्य छोटे सहयोगी दलों के लिए 1 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित रखा गया है।
राज्य में महायुति सरकार बनने के बाद विभिन्न महामंडलों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियों की उम्मीद थी। लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार, स्थानीय निकायों से जुड़े मुद्दों, संगठनात्मक बदलावों और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण यह फैसला लगातार टलता रहा। इससे सत्तारूढ़ दलों के कई इच्छुक नेता और कार्यकर्ता अवसर की प्रतीक्षा कर रहे थे। अब फॉर्मूला तय होने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
विधानसभा में दलों की संख्या और सरकार में उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए यह फॉर्मूला तैयार किया गया है। इसी वजह से सबसे अधिक विधायकों वाली भाजपा को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है। इसके बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना और सुनेत्रा पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
महायुति के अन्य सहयोगी दलों को केवल 1 प्रतिशत हिस्सा मिलने की खबर से उनमें नाराजगी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, दूसरी ओर कई महीनों से लंबित नियुक्तियों का रास्ता साफ होने से महायुति के इच्छुक पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में संतोष का माहौल बताया जा रहा है।
हालांकि, इस फॉर्मूले को लेकर राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद विभिन्न महामंडलों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियों की घोषणा चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।