Mumbai News: लाडली से तिजोरी की हालत पतली, बवाल के बाद नाईक का यू-टर्न

Ladki Bahin Yojna: महाराष्ट्र विधान परिषद में वन मंत्री गणेश नाईक ने ‘मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन’ योजना से विभागों पर आर्थिक दबाव की बात कही, लेकिन बाद में यू-टर्न लेते हुए योजना जारी रहने की पुष्टि क
Maharashtra forest department
LadKi Bahin Yojna (सोर्सः सोशल मी़डिया)
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Maharashtra Legislative Council: महाराष्ट्र विधान परिषद में शुक्रवार को अजीबोगरीब नजारा देखने को मिला, जब स्वयं वन मंत्री गणेश नाईक की जुबान से ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीन’ योजना को लेकर एक बड़ी बात सामने आ गई। कांग्रेस सदस्य सतेज पाटील के सवाल का जवाब देते हुए नाईक ने स्वीकार किया कि इस योजना के कारण अन्य विभागों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है। हालांकि चूक का अहसास होते ही नाईक ने तुरंत यू-टर्न भी ले लिया।

सतेज पाटील ने कोल्हापुर जिले के शाहुवाडी, राधानगरी और गगनबावडा क्षेत्रों में जंगल के भीतर बसे धनगरवाड़ों और आदिवासी बस्तियों की दुर्दशा का मुद्दा उठाया। उन्होंने हाल ही में एक मरीज को तीन किलोमीटर तक कंधे पर उठाकर ले जाने की घटना का जिक्र करते हुए सरकार से पूछा कि क्या वन विभाग इन बस्तियों तक सड़क पहुंचाने के लिए कोई विशेष अभियान चलाएगा। इसी सवाल का जवाब देते हुए गणेश नाईक के मुंह से निकल गया कि ‘लाडली बहन’ योजना के कारण अन्य विभागों पर ‘अन्याय’ हो रहा है। जैसे ही उन्हें अपनी टिप्पणी का अहसास हुआ, उन्होंने तुरंत सफाई भी दे दी।

बोले, फिर भी बंद नहीं होगी योजना

नाईक ने स्पष्ट किया कि चाहे कुछ भी हो, ‘लाडली बहन’ योजना बंद नहीं होगी। साथ ही उन्होंने वन विभाग की वित्तीय स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि विभाग के पास कटाई के लिए उपलब्ध लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की सागवान संपत्ति है, जिसके आधार पर किसी बैंक से 6 हजार करोड़ रुपये का ऋण लेने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस राशि से वन कर्मचारियों के वेतन, पर्यटन विकास, बुनियादी सुविधाओं और धनगरवाड़ों तक सड़क निर्माण जैसी समस्याओं का समाधान किया जा सकेगा।

वन क्षेत्रों के निवासियों के पुनर्वास का भी वादा

मंत्री नाईक ने कहा कि इस निधि से वन क्षेत्रों में बसी बस्तियों के पुनर्वास की समस्या भी सुलझेगी। विशेष रूप से बाघ परियोजना क्षेत्रों से मानव बस्तियों को हटाने से मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सकेगा। यह प्रस्ताव जल्द ही मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। उनके इस बयान ने विपक्ष को एक बार फिर महायुती सरकार पर निशाना साधने का अवसर दे दिया है।

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