Maharashtra Ladki Bahin Yojana: लाभार्थियों की संख्या को लेकर सियासत तेज, विपक्ष ने सरकार को घेरा
Maharashtra Ladki Bahin Yojana को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष का दावा है कि 80 लाख महिलाओं को योजना से बाहर कर दिया गया है, जबकि सरकार ने इसे भ्रामक बताया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
लाड़की बहिण योजना को लेकर रोहित पवार ने बोला अदिति तटकरे पर हमला (सौ. डिजाइन फोटो )
Maharashtra Ladki Bahin Yojana News: विपक्ष का दावा है कि मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना में ई-केवाईसी प्रक्रिया के बाद 80 लाख महिलाओं को इस योजना से बाहर कर दिया गया है। हालांकि महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने सोमवार को कहा कि यह आरोप भ्रामक है और इन लाभार्थियों का सत्यापन विभिन्न मानदंडों के अनुसार जारी है।
उन्होंने कहा कि इस संख्या में वे महिलाएं भी शामिल हैं जिन्होंने ई-केवाईसी नहीं कराया है। अदिति ने बताया कि लाभार्थी में कई महिलाएं ऐसी भी हैं। जिन्होंने आयु सीमा पूरी कर ली है या फिर वे महिलाएं जो अन्य योजनाओं का लाभ ले रही हैं। उन्होंने कहा कि ई-केवाईसी प्रक्रिया पिछले साल अगस्त से शुरू की गई थी।
हालांकि, ई-केवाईसी का मानदंड केवल लाडली बहन योजना के लिए ही नहीं, बल्कि राज्य की सभी प्रत्यक्ष लाभहस्तांतरण (डीबीटी) योजनाओं के लिए लागू है। इसलिए, 80 लाख का आंकड़ा केवल उन महिलाओं का नहीं है जिन्होंने लाडली योजना के लिए ई-केवाईसी नहीं कराया है। तटकरे ने कहा कि फरवरी और मार्च महीनों के लिए अनुदान वितरण जारी है।
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‘गंभीर वित्तीय संकट’ : पाटिल
विपक्षी राकां शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल ने दावा किया कि योजना से लाभार्थियों को हटाना राज्य के “गंभीर वित्तीय संकट” को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के खराब प्रदर्शन के बाद और विधानसभा चुनावों से पहले इस योजना को लागू किया गया था।
जिसके तहत महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक सहायता दी जाती है। पाटिल ने कहा कि अब 80 लाख महिला लाभार्थियों को अपात्र घोषित कर दिया गया है। यह उन्हीं लोगों को धोखा देना है, जिन्हें सहायता का वादा किया गया था।
लाभार्थियों के साथ विश्वासघात : वडेट्टीवार
कांग्रेस विधायक दल नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि महायुति ने यह योजना केवल वोट हासिल करने के मकसद से शुरू की गई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि महिलाओं को नाराज और निराश करने की कीमत सत्तारूढ़ गठबंधन को चुकानी पड़ेगी।
योजना को लागू करने में गड़बड़झाला : सुप्रिया
यह हैरानी की बात है कि सरकार को करीब डेढ़ साल बाद यह एहसास हुआ कि 80 लाख महिलाएं कथित रूप से इस योजना के लिए पात्र नहीं थी। इससे पता चलता है कि राजनीतिक, प्रशासनिक और क्रियान्वयन-तीनों स्तरों पर सरकार की गंभीर सामूहिक विफलता रही है। यह योजना करदाताओं के रुपये से क्रियान्वित की जा रही है। ऐसे में एक अहम सवाल उठता है कि क्या सरकार पिछले डेढ़ साल से अपात्र लाभार्थियों को जनता का धन बांट रही थी।
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सरकार योजना बंद करना चाहती है: रोहित
- राकां शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार लाडली बहन योजना को धीरे-धीरे बंद करने के इरादे से लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से हटा रही है।
- उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले योजना में 2.47 करोड़ लाभार्थी थीं, जबकि अब करीब 81 लाख महिलाओं के नाम सूची से हटा दिए गए है। केवाईसी तो बस एक बहाना है। असली मकसद लाभार्थियों को अलग-अलग चरणों में हटाकर योजना को बंद करना है।
