HSRP नंबर प्लेट (सोर्स: AI)
HSRP Number Plate Vehicle Penalty: महाराष्ट्र में पुराने वाहनों के लिए हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट (HSRP) की डेडलाइन गुजर चुकी है, लेकिन चालान की आहट अब तक सुनाई नहीं दी। 1 जनवरी की सुबह जब लाखों वाहन मालिक जुर्माने के डर से सहमे थे, तभी परिवहन विभाग के एक फैसले ने पूरे मामले को सस्पेंस में डाल दिया। अब सवाल यह है कि क्या सचमुच कार्रवाई टल गई है, या बात कुछ और है? आइए जानते हैं।
31 दिसंबर 2025 की समयसीमा समाप्त होने के बावजूद पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए राहत भरी खबर है। परिवहन विभाग ने फिलहाल दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है। नई एजेंसियों की नियुक्ति प्रक्रिया चलने के कारण जुर्माने पर अस्थायी रोक लगा दी गई है, जिससे वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिली है।
महाराष्ट्र सरकार ने पुरानी गाड़ियों के लिए HSRP लगवाना अनिवार्य किया था, जिसकी अंतिम तिथि 31 दिसंबर, 2025 तय की गई थी। पहले इस काम के लिए तीन मुख्य एजेंसियों रोजमार्टा सेफ्टी सिस्टम, रियल मेज़ोन इंडिया और FTA HSRP सॉल्यूशंस को नियुक्त किया गया था। हालांकि, इन ठेकेदारों का अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) अब समाप्त हो गया है। इस वजह से परिवहन विभाग ने एक नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की है और वह नए ठेकेदार की तलाश कर रहा है। विभाग ने संकेत दिया है कि जब तक नई एजेंसी काम नहीं संभाल लेती, तब तक बिना नई नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।
नियमों के अनुसार, सरकार ने उन वाहन मालिकों पर कड़े जुर्माने का प्रावधान रखा था जिन्होंने अब तक हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट (HSRP) नहीं लगवाई है। नियम यह था कि यदि किसी ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन तो कराया है लेकिन नंबर प्लेट नहीं लगवाई, तो उस पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, जिन्होंने इस प्रक्रिया को शुरू ही नहीं किया, उन पर 10,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान था। लेकिन वर्तमान में, नई एजेंसी के अभाव और प्रशासनिक भ्रम की स्थिति के कारण इस दंडात्मक कार्रवाई को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है। महाराष्ट्र में लगभग 2.1 करोड़ पुरानी गाड़ियां हैं। इनमें से अब तक लगभग 97 लाख गाड़ियों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो चुका है, लेकिन वास्तव में केवल 75 लाख गाड़ियों में ही नई नंबर प्लेट लगाई जा सकी हैं। इसका अर्थ है कि राज्य में अभी भी करोड़ों वाहन ऐसे हैं जिन्हें नई HSRP का इंतजार है। फिटमेंट सेंटर्स की कमी और अपॉइंटमेंट मिलने में आने वाली दिक्कतों ने भी इस प्रक्रिया को धीमा कर दिया है।
परिवहन कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि जिन वाहन मालिकों ने पहले ही ऑनलाइन बुकिंग कर ली है, उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए और तय तारीख व समय पर संबंधित सेंटर जाकर प्लेट लगवा लेनी चाहिए। इससे भविष्य में कार्रवाई शुरू होने पर उन्हें किसी भी तरह की कानूनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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हालांकि, अभी भी कुछ मुद्दों पर नीतिगत स्पष्टता का अभाव है। पुलिस या RTO द्वारा अलग-अलग अपराधों या दुर्घटनाओं में जब्त की गई लाखों गाड़ियां फिलहाल धूल खा रही हैं। इसके अलावा, जो गाड़ियां स्क्रैप कर दी गई हैं, उनके लिए HSRP की अनिवार्यता को लेकर प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है।
संक्षेप में, हालांकि डेडलाइन निकल चुकी है, लेकिन फिलहाल वाहन मालिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। फिर भी, भविष्य की सख्ती से बचने के लिए प्रक्रिया पूरी करना ही वाहन मालिकों के हित में होगा। यह स्थिति उस बस की तरह है जो स्टॉप पर तो खड़ी है, लेकिन ड्राइवर के न होने के कारण फिलहाल चल नहीं रही है; जैसे ही नया ड्राइवर (एजेंसी) आएगा, यात्रा (कार्रवाई) फिर से शुरू हो जाएगी।