

बेस्ट क्षेत्र के 869 सरकारी बिजली उपभोक्ताओं के बिलों का भुगतान अब केंद्रीकृत होगा।
सरकार ने संयुक्त बिलिंग के लिए ₹108.30 करोड़ का अतिरिक्त बजट तय किया।
120 दिनों में व्यवस्था लागू होगी, जिससे ब्याज और जुर्माने से बचाव होगा।
Maharashtra Government Centralized Electricity Bill: सरकारी विभागों के बिजली बिलों के भुगतान में देरी, व्याज और दंड से बचने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है।
हाल ही में जारी शासनादेश (जीआर) के अनुसार मुंबई में बेस्ट के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राज्य सरकार के सभी कार्यालयों, बीएमसी और राज्य सरकार की नियंत्रित संस्थाओं के बिजली बिलों का भुगतान अब संयुक्त बिलिंग प्रणाली के जरिए केंद्रीकृत तरीके से किया जाएगा।
विभागों के बिजली बिल एक ही मंच के माध्यम से भरे जाएंगे। सरकार ने इसके लिए 120 दिनों की चरणबद्ध कार्ययोजना तय की है। साथ ही संयुक्त वॉलेट में अग्रिम राशि जमा करने के लिए लगभग 108.30 करोड़ रुपए के अतिरिक्त वार्षिक बजटीय प्रावधान का निर्देश दिया गया है।
जीआर के मुताबिक, मुंबई शहर में 869 सरकारी बिजली उपभोक्ताओं के बिल बकाया हैं। अलग-अलग कार्यालयों में बिलों की जांच, निधि जुटाने और भुगतान की प्रक्रिया में देरी के कारण ब्याज व विलंब शुल्क का बोझ लगातार बढ़ता है। नई व्यवस्था में बिजली बिलों का भुगतान स्वतः होने से ऐसी सभी परेशानियों को कम करने का मुख्य लक्ष्य रखा गया है।
बेस्ट की संयुक्त बिलिंग प्रणाली में एक ही विभाग या संस्था के बिजली कनेक्शनों का एक समूह बनाया जाएगा। सभी कनेक्शनों के बिल एक मंच पर उपलब्ध होंगे और निर्धारित व्यवस्था के तहत हर महीने भुगतान स्वतः किया जा सकेगा।
अधिकारी बिजली की खपत, बिल, बकाया और वॉलेट में उपलब्ध राशि की सटीक जानकारी डैशबोर्ड पर देख सकेंगे, बिजली बिल संबंधी शिकायतें भी इसी ऑनलाइन मच पर आसानी से दर्ज की जा सकेंगी। पहले वरण में सभी विभागों और कार्यालयों को 15 दिनों के भीतर पोर्टल पर पंजीकरण कर नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। 30 दिनों के भीतर बिजली उपभोक्ताओं का विवरण सत्यापित कर उसे अपलोड करना होगा।
दायरा: बेस्ट के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सरकारी कार्यालय, बीएमसी और राज्य शासन नियंत्रित सभी संस्थाएं।
मौजूदा स्थितिः 869 सरकारी बिजली उपभोक्ताओं के बिल वर्तमान में बकाया चल रहे हैं।
पंजीकरण: पोर्टल पर 15 दिनों के भीतर पंजीकरण और नोडल अधिकारी की नियुक्ति करना अनिवार्य।
बजटीय प्रावधानः व्यवस्था को सुचारू चलाने के लिए 108.30 करोड़ रुपए की अतिरिक्त वार्षिक व्यवस्था।
अग्रिम निधिः 31 दिसंबर 2026 तक विभागवार तिमाही बिलों के बराबर राशि वॉलेट में जमा करने का निर्देश।
कार्यान्वयन लक्ष्यः आगामी 120 दिनों के भीतर इस पूरी व्यवस्था का चरणबद्ध क्रियान्वयन करना।
संभावित लाभः समय पर भुगतान, ब्याज और दंड से बचाव तथा प्रशासनिक कामकाज में भारी कमी।