MSPSA Act Bombay High Court: महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट से कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और एआईटीयूसी की ओर से महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (एमएसपीएसए) को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज करने का अनुरोध किया। सरकार ने इन याचिकाओं को 'बेबुनियाद' बताते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य वामपंथी उग्रवाद से जुड़ी गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी ढंग से रोक लगाना है।
याचिकाकर्ताओं ने कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए दावा किया है कि इसका संभावित दुरुपयोग हो सकता है और यह संविधान द्वारा संरक्षित शांतिपूर्ण एवं वैध असहमति को दबाने का माध्यम बन सकता है। कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अंखड ने बिना कोई कारण बताए खुद को मामले से अलग कर लिया। अब इन याचिकाओं पर हाई कोर्ट की दूसरी खंडपीठ सुनवाई करेगी।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता मिलिद साठे ने याचिकाओं को खारिज करने की मांग की। वहीं, एआईटीयूसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नवरोज सीरवाई ने सरकार के दावे पर पलटवार करते हुए कहा कि बेबुनियाद याचिकाएं नहीं, बल्कि महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम है।
महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम को पिछले साल जुलाई में राज्य विधानसभा से पारित किया गया था। दिसंबर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून प्रभावी हुआ। इसका उद्देश्य वामपंथी चरमपंथी संगठनों और इसी तरह की संस्थाओं की कुछ गैरकानूनी गतिविधियों को रोकना बताया गया है।
अधिनियम में चार तरह की गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इनमें किसी गैरकानूनी संगठन की सदस्यता लेना तथा गैर-सदस्य द्वारा ऐसे संगठन के लिए धन जुटाना, उसके कामकाज में सहायता करना या कोई गैरकानूनी गतिविधि करना शामिल है। कानून के तहत सरकार को किसी संगठन को 'गैरकानूनी संगठन घोषित करने का अधिकार भी दिया गया है।