बालभारती की किताब व मंत्री दादा भुसे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Balbharati Books Identification: महाराष्ट्र में शिक्षा के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। राज्य सरकार ने सरकारी एजेंसी ‘बालभारती’ द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पाठ्यपुस्तकों की अवैध छपाई और बिक्री को रोकने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भूसे ने शुक्रवार को विधानसभा में इस गंभीर मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखते हुए कड़े कदमों की घोषणा की।
मंत्री दादा भूसे ने विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान एक लिखित उत्तर में बताया कि दिसंबर 2025 में नागपुर जिले के हिंगना एमआईडीसी (MIDC) क्षेत्र में एक निजी प्रिंटिंग प्रेस पर बड़ी छापेमारी की गई थी। इस कार्रवाई के दौरान कक्षा 9वीं से 12वीं तक की पाठ्यपुस्तकों की 20,000 से अधिक नकली प्रतियां जब्त की गईं। ‘बालभारती’ (महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक उत्पादन और पाठ्यक्रम अनुसंधान ब्यूरो) के अधिकारियों ने मौके पर जाकर जब इन किताबों का निरीक्षण किया, तो पाया कि इन्हें बिना किसी अनुमति के अवैध रूप से छापा जा रहा था।
इस अवैध गतिविधि का पता चलने के तुरंत बाद, संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संबंधित प्रिंटिंग प्रेस के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है और नकली किताबों के पूरे जखीरे को जब्त कर लिया है। सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य भर के क्षेत्रीय अधिकारियों को सतर्क कर दिया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में निजी प्रिंटिंग प्रेसों की निरंतर निगरानी करें और कहीं भी संदिग्ध गतिविधि पाए जाने पर तत्काल जांच और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।
अभिभावकों और छात्रों को नकली किताबों के जाल से बचाने के लिए सरकार अब तकनीक का उपयोग करने जा रही है। शिक्षा मंत्री ने घोषणा की कि इस शैक्षणिक वर्ष से, बालभारती द्वारा प्रकाशित आधिकारिक पाठ्यपुस्तकों के विशिष्ट पृष्ठों पर विशेष ‘क्यूआर कोड’ (QR Code) मुद्रित किए जाएंगे। इस कोड को स्कैन करके कोई भी आसानी से यह पता लगा सकेगा कि किताब असली है या किसी निजी प्रेस द्वारा अवैध रूप से छापी गई नकल।
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अभियान केवल तकनीकी बदलाव ही नहीं, बल्कि जन-भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार मई और जून के महीने में मीडिया के माध्यम से एक व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाएगी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, अभिभावकों और पुस्तक विक्रेताओं को असली पाठ्यपुस्तकों की पहचान करने के तरीकों के बारे में शिक्षित करना है। सरकार का लक्ष्य है कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले हर किसी को इस फर्जीवाड़े के प्रति सचेत कर दिया जाए ताकि माफियाओं के हौसले पस्त हो सकें।