महाराष्ट्र में 18 और तालुकाओं में सूखा सर्वे को मंजूरी, जमीनी हालात परखने पहुंची केंद्रीय टीम

Maharashtra Drought News: महाराष्ट्र सरकार ने सूखे की स्थिति का सटीक आकलन करने के लिए 18 अतिरिक्त तालुकाओं में जमीनी सर्वेक्षण को मंजूरी दी है। केंद्रीय टीम ने भी मराठवाड़ा में फसलों का जायजा लिया।
Survey approved in 18 additional talukas to assess the ground reality of the drought in Maharashtra
महाराष्ट्र सूखा जमीनी सर्वेक्षण, प्रतीकात्मक तस्वीरफोटो सोर्स:- सोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights

  • महाराष्ट्र में सूखे की जांच के लिए 18 अतिरिक्त तालुकाओं में सर्वेक्षण मंजूर।

  • फडणवीस और बावनकुले के निर्देश पर शासन निर्णय जारी।

  • पांच प्रमुख फसलों के 20% क्षेत्र का जमीनी सर्वेक्षण होगा।

  • आठ जिलों के चयनित तालुकाओं में फसल नुकसान का आकलन किया जाएगा।

Maharashtra Drought Ground Survey: महाराष्ट्र में सूखे की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए राज्य सरकार ने 18 अतिरिक्त तालुकाओं में प्रत्यक्ष जमीनी जांच को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सूखा निवारण मंत्रिमंडल उपसमिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले के निर्देशों के बाद मदद एवं पुनर्वास विभाग ने इस संबंध में शासन निर्णय जारी किया है। इसका उद्देश्य उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों का खेतों की वास्तविक स्थिति से मिलान कर प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सटीक जानकारी जुटाना है।

प्रमुख फसलों के 20 प्रतिशत क्षेत्र का होगा सर्वेक्षण

सूखा प्रबंधन नियमावली 2016 के प्रावधानों के तहत चयनित 18 तालुकाओं में प्रमुख पांच फसलों के कुल क्षेत्र के 20 प्रतिशत हिस्से का प्रत्यक्ष सर्वेक्षण किया जाएगा। इस प्रक्रिया में उपग्रह छवियों और डिजिटल आंकड़ों का जमीनी स्तर पर सत्यापन होगा। इससे फसल नुकसान और सूखे की गंभीरता का वास्तविक आकलन करने में मदद मिलेगी।

चयनित क्षेत्रों में नांदेड़ जिले के मुदखेड और मुखेड, चंद्रपुर के जिवती, ब्रह्मपुरी और बल्लारपुर, गोंदिया के आमगांव, देवरी, सालेकसा और गोंदिया शामिल हैं। इसके अलावा वर्धा का कारंजा, भंडारा के मोहाडी और तुमसर, नाशिक के त्र्यंबकेश्वर, चांदवड और निफाड, सातारा का पाटण तथा सांगली के शिराला और वालवा तालुके भी सर्वेक्षण के दायरे में हैं।

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पहले 265 तालुकाओं में घोषित हुआ था सूखा

जून से सितंबर 2026 के दौरान कम बारिश के कारण ट्रिगर-1 मानकों के आधार पर राज्य के 265 तालुकाओं में सूखा घोषित किया जा चुका है। इन क्षेत्रों में किसानों के लिए 12 प्रकार की राहत योजनाएं लागू की गई हैं। अब अतिरिक्त तालुकाओं में जमीनी जांच के नतीजों के आधार पर आगे के निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

केंद्रीय टीम ने खेतों में पहुंचकर देखा फसल नुकसान

इस बीच, मराठवाड़ा और अमरावती संभाग में सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयीन टीम ने शुक्रवार को विभिन्न जिलों में खेतों और जल स्रोतों का निरीक्षण किया। टीम ने किसानों से बातचीत कर फसल नुकसान, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता और उनकी आर्थिक परेशानियों की जानकारी ली। निरीक्षण के आधार पर केंद्र सरकार को स्थिति और आवश्यक राहत उपायों के संबंध में रिपोर्ट दी जाएगी।

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सोयाबीन और मोसंबी की फसलों को नुकसान

छत्रपति संभाजीनगर जिले के देमनी गांव में किसान विलास शिंदे के खेत में 1.20 हेक्टेयर क्षेत्र में लगी सोयाबीन की पूरी फसल बारिश की कमी से सूख गई।

वहीं, जालना जिले के नाणेगांव में सूखी सोयाबीन की फसल, किणगांव वाड़ी में सूखे मोसंबी के पेड़ों और सूखे खेत तालाब का निरीक्षण किया गया। इन हालात से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सूखे की वास्तविक स्थिति का आकलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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