

महाराष्ट्र में चारा उत्पादन के लिए जिला योजना का कम से कम 5% फंड आवंटित होगा।
सूखे चारे की दर ₹12 और साइलेज की ₹8 प्रति किलो तय की गई है।
सुप्रिया सुले ने सहकारी संस्थाओं से सूखाग्रस्त किसानों को चारा, पानी और शिक्षा में मदद की अपील की है।
Maharashtra Drought Fodder Action Plan: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में चारे की किल्लत को दूर करने के लिए एक व्यापक कार्य योजना (एक्शन प्लान) लागू की है। पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे ने बताया कि अल-नीनो के प्रभाव से उत्पन्न सूखे को देखते हुए जिला वार्षिक योजना का न्यूनतम 5 प्रतिशत फंड चारा उत्पादन और संवर्धन के लिए आवंटित किया जाएगा।
इसके साथ ही सरकार ने सूखे की अवधि के दौरान सूखा चारा और साइलेज (मुरघास) के लिए अधिकतम मूलभूत दरें भी तय कर दी हैं। सरकार ने सूखे चारे की अधिकतम मूलभूत कीमत 12 रुपये प्रति किलो और साइलेज की 8 रुपये प्रति किलो निर्धारित की है। इसमें परिवहन खर्च शामिल नहीं होगा, ये दरें वर्ष 2026-27 के घोषित सूखा काल के दौरान लागू रहेंगी।
चारे की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी मानक तय किए गए हैं। हर जिले में चारा बैंक स्थापित करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा हाइड्रोपोनिक्स, अजोला और बिना कांटों वाले कैक्टस के जरिए वैकल्पिक चारा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।
कम पानी में चारा उगाने वाली फसलों की खेती भी प्रोत्साहित होगी। किसानों को चारे के संरक्षण, साइलेज निर्माण और भंडारण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। चारा प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य में तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
चारे की खरीद में गुणवत्ता की जांच को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने छह प्रयोगशालाओं को परीक्षण के लिए अधिकृत किया है। इनमे पुणे के गोखलेनगर स्थित पशु आहार विश्लेषण प्रयोगशाला, औंध स्थित भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी राज्यस्तरीय रोग जाच सस्थान और महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा महाविद्यालय की प्रयोगशाला शामिल है। इसके अलावा, गुजरात के आनंद स्थित एनडीडीबी बछड़ा प्रयोगशाला, बेंगलुरु के राष्ट्रीय पशु पोषण एवं शरीर क्रिया विज्ञान संस्थान तथा सरकार से मान्यता प्राप्त खाद्य विश्लेषण प्रयोगशालाओं में भी चारे की गुणवत्ता की जांच की जा सकेगी।
बारिश की बेरुखी के चलते राज्य के कई हिस्सों में सूखे की गंभीर स्थिति बनने की आशंका के बीच किसानों और पशुपालकों की मदद के लिए सांसद सुप्रिया सुले ने पुणे जिले की बड़ी सहकारी संस्थाओं से आगे आने की अपील की है।
उन्होंने पुणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक, दूध उत्पादक संघों और चीनी मिलों को पत्र लिखकर सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारा डिपो, चारा शिविर और पीने के पानी की व्यवस्था करने का आग्रह किया है। साथ ही ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट दूर करने के लिए टैंकर उपलब्ध कराने और प्रभावित किसान परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष सहायता योजना शुरू करने की मांग भी की है।
घास की गुणवत्ता को लेकर भी विस्तृत मानक तय किए गए हैं। घास अच्छी तरह संरक्षित और वायुरोधी अवस्था में होनी चाहिए तथा उसमें फफूंद नहीं होनी चाहिए।
इसमें नमी की मात्रा 62 से 70 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए। इसका पीएच स्तर 3.5 से 4.4 निर्धारित किया गया है, जबकि कच्चे प्रोटीन की मात्रा कम से कम 9 प्रतिशत होना आवश्यक है।
इसके अलावा, घास में कच्चे रेशे की मात्रा अधिकतम 35 प्रतिशत या न्यूट्रल डिटर्जेंट फाइबर की मात्रा 60 प्रतिशत होनी चाहिए।
एफ्लाटॉक्सिन-थी की मात्रा अधिकतम 20 पीपीबी निर्धारित की गई है। इन मानकों का उद्देश्य पशुओं को पौष्टिक और सुरक्षित चारा उपलब्ध कराना है।