महावितरण (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra Cheap Electricity: ग्रीन एनर्जी पर विशेष जोर देते हुए महाराष्ट्र ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है।
एक तरफ जहां किसानों को 9 लाख से अधिक सौर पंप उपलब्ध कराकर महाराष्ट्र कृषि सौर पंप स्थापना में नंबर वन बन गया है, वहीं प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को भी सफलतापूर्वक लागू कर महाराष्ट्र अव्वल स्थान पर आ गया है।
राज्य में 4.90 लाख से अधिक घरों में सोलर रूफटॉप प्लांट लगाए जा चुके हैं। इस तरह ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में तेज प्रगति कर महाराष्ट्र सरकार ने इसका लाभ पूरे राज्य के उपभोक्ताओं को प्रदान करने की योजना बनाई है। उससे अगले 5 साल राज्य में बिजली की दरें बढ़ेंगी नहीं बल्कि सभी उपभोक्ताओं के लिए सस्ती होंगी।
घरेलू ग्राहकों (100 यूनिट तक) के लिए तो 26% तक सस्ती होने वाली है। यह महत्वपूर्ण जानकारी महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (महावितरण) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र ने ‘नवभारत’ के साथ एक विशेष बातचीत में साझा की।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1993 बैच के वरिष्ठ अधिकारी लोकेश चंद्र के कुशल नेतृत्व में महावितरण ने राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किया है। वित्त वर्ष 2025 में महावितरण ने 922 करोड़ रुपये का अच्छा मुनाफा अर्जित किया है।
लोकेश चंद्र ने बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कुशल मार्गदर्शन में राज्य में अगले 5 साल बिजली की दरें नहीं बढ़ाने और चरणबद्ध तरीके से घरेलू, इंडस्ट्रयल, कमर्शियल यानी सभी उपभोक्ताओं के लिए कटौती करने की योजना बनाई गयी है।
यह उपलब्धि हासिल करने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य होगा और यह लक्ष्य दो कारणों से साकार हो रहा है। पहला, राज्य में पर्यावरण अनुकूल और किफायती ग्रीन एनर्जी (सोलर-विंड पावर) का उत्पादन अधिक से अधिक बढ़ाया जा रहा है।
पावर कंपनियों के साथ नए ग्रीन एनर्जी खरीद समझौते लगभग 3 रुपये प्रति यूनिट पर ही किए जा रहे हैं। इससे बड़ी बचत होगी और हम सस्ती बिजली देने में कामयाब होंगे। दूसरी तरफ राज्य के किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराकर उन्हें ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
महावितरण के सीएमडी लोकेश चंद्र ने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत भी बड़ी सफलता मिली है। सिर्फ 5 महीनों में ही 1।08 लाख घरों से अधिक घरों में सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित स्थापित करके महाराष्ट्र ने देश में पहला स्थान हासिल किया है।
अब तक 1800 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता लग गयी है और उपभोक्ताओं को कुल 3300 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गयी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू की गयी यह क्रांतिकारी योजना मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में राज्य में तेजी से आगे बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री चाहते हैं कि राज्य में प्रति माह 300 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले आम घरेलू उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य हो और वे अतिरिक्त बिजली बेचकर आय अर्जित कर सकें। मुंबई महानगर क्षेत्र में भी तेजी से इसका विस्तार हो रहा है।
अब तक 4500 हाउसिंग सोसायटीज में 74 मेगावाट के सोलर रूफटॉप प्लांट लगाए जा चुके है। इन सोसायटीज को 123 करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया गया है। इससे हाउसिंग सोसायटीज ऊर्जा में आत्मनिर्भर बन रही है। 1 करोड़ उपभोक्ता बने ‘स्मार्ट’ राज्य में स्मार्ट मीटर योजना के तहत अब तक 1 करोड़ से भी अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और अब अगले एक साल में सभी 2.25 करोड़ उपभोक्ताओं को ‘स्मार्ट’ बनाने पर तेजी से काम हो रहा है।
स्मार्ट मीटर को लेकर शुरू में लोगों में यह गलत धारणा थी कि इससे ज्यादा बिल आएगा, लेकिन जब लोगों ने इसका उपयोग शुरू किया तो उल्टे बिजली बिलों में बचत होने लगी है क्योंकि स्मार्ट मीटर होने से उपभोक्ता बिजली की बर्बादी का कंट्रोल कर सकता है। ‘स्मार्ट’ उपभोक्ताओं को दिन में सुबह 9 से शाम 5 बजे तक बिजली इस्तेमाल पर प्रति यूनिट ४० पैसे की विशेष छूट भी जाती है।
साथ ही, स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बिजली बिलों से संबंधित शिकायतें लगभग शून्य हो गई है। पहले 2 लाख से अधिक शिकायतें हर महीने आती थीं। स्मार्ट मीटर से महावितरण को बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के साथ लीकेज रोकने में भी सफलता मिली है।
बिजली चोरी बंद होने से ईमानदार उपभोक्ताओं पर भी भार कम हुआ है। महावितरण हर उपभोक्ता को ऑनलाइन कनेक्शन आवेदन, ऑनलाइन पेमेंट और ऑनलाइन ही शिकायत समाधान सुविधा प्रदान कर रहा है। इसके अलावा ग्राहकों की सुविधा के लिए व्हाट्सअप सेवा भी शुरू की जा रही है।
बिजली की बढ़ती माग और आपूर्ति पर लोकेश चंद्र ने कहा कि महाराष्ट्र में तेजी से हो रही इंडस्ट्रयल ग्रोथ के कारण बिजली की मांग 15% तक बढ़ गयी है। महाराष्ट्र को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में महावितरण अहम भूमिका अदा करेंगा।
महावितरण ने राज्य में बिजली की बढ़ती मांग को देख अगले 5 साल में बिजली उत्पादन क्षमता 38,000 से दोगुनी बढ़ाकर 82,000 मेगावाट करने की योजना बनाई है, जिसमें 52% ग्रीन एनर्जी होगी और इसके साथ महाराष्ट्र इको-फ्रेंडली ग्रीन एनर्जी में नंबर वन बन जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि जितनी बिजली उत्पादन क्षमता पिछले 75 वर्षों में तैयार की गयी, उतनी अतिरिक्त क्षमता अगले 5 साल में तैयार हो जाएगी।
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लोकेश चंद्र ने बताया कि हमारा फोकस महावितरण की वित्तीय स्थिति को लगातार मजबूत करने पर है। परिचालन स्तर पर सुधार करने के साथ-साथ हम हमारे बैंकों से बातचीत कर उच्च व्याज दरों वाले कर्मों को कम ब्याज दरों वाले कर्जी में तब्दील कर रहे हैं।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए विष्णु भारद्वाज की रिपोर्ट