आरे कॉलोनी की 33.6 एकड़ जमीन सरकार ने वापस ली, 20 साल पुरानी पुनर्वास योजना रद्द
Aarey Slum Rehabilitation: मुंबई की आरे दुग्ध कॉलोनी में झोपड़पट्टी पुनर्वास के लिए वर्ष 2006 में आवंटित 33.6 एकड़ भूमि महाराष्ट्र सरकार ने वापस लेने का फैसला किया है। परियोजना पर स्थायी रोक लग गई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
आरे कॉलोनी ज़मीन विवाद (सौ. सोशल मीडिया )
Aarey Slum Rehabilitation News: मुंबई की आरे दुग्ध कॉलोनी में झोपड़पट्टीवासियों के पुनर्वास से जुड़े लगभग दो दशक पुराने भूमि आवंटन निर्णय को महाराष्ट्र सरकार ने रद्द कर दिया है। सरकार ने वर्ष 2006 में झोपड़पट्टी पुनर्वास परियोजना के लिए बामकोटेक प्रा लि को आवंटित गोरेगांव स्थित 33.6 एकड़ जमीन को वापस अपने कब्जे में लेने का फैसला किया है।
इको-सेंसिटिव जोन और ग्रीन जोन में शामिल होने के कारण इस भूमि पर किसी भी प्रकार का पुनर्वास या निर्माण कार्य संभव नहीं होने का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री की मंजूरी के बद यह निर्णय लिया गया। सरकार के इस कदम से आरे क्षेत्र में प्रस्तावित पुनर्वास योजना पर औपचारिक रूप से विराम लग गया है।
कृषि, पशुसंवर्धन, दुग्ध व्यवसाय विकास व मत्स्य व्यवसाय विभाग द्वारा सोमवार को जारी शासनादेश के मुताबिक 28 जून 2006 को आरे दुग्ध कॉलोनी में रहने वाले झोपड़पट्टीवासियों के पुनर्वास के उद्देश्य से बामकोटेक प्रा लि को परियोजना कार्यान्वित करने की अनुमति दी गई थी। इसके लिए गोरेगांव के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित 33.6 एकड़ भूमि कंपनी को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था।
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दिया गया अब अंतिम रूप
हालांकि, बाद में यह मामला विवादों में घिर गया क्योंकि संबंधित भूमि ‘नो डेवलपमेंट जोन’ में आती थी और वहां निर्माण गतिविधियों की अनुमति नहीं थी, इसी आधार पर वर्ष 2006 में मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर शासनादेश को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि पर्यावरणीय प्रतिबंधों वाले क्षेत्र में पुनर्वास परियोजना को मंजूरी देना नियमों के विपरीत है। उच्च न्यायालय ने अन्य संबंधित प्रकरणों में दिए गए निर्णयों का संदर्भ लेते हुए 11 जुलाई 2025 को याचिका का निपटारा कर दिया था। दुग्ध व्यवसाय विकास आयुक्त द्वारा सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया कि आरे दुग्ध कॉलोनी का पूरा क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है।
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आरे क्षेत्र को घोषित किया इको सेंसिटिव जोन
केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 5 दिसंबर 2016 को जारी अधिसूचना के माध्यम से आरे क्षेत्र को ‘इको सेंसिटिव जोन’ घोषित किया था। मनपा के विकास प्रारूप 2014-2034 में भी ‘ग्रीन जोन’ के रूप में अधिसूचित किया गया है। राज्य सरकार के अनुसार इन पर्यावरणीय और नियोजन संबंधी प्रतिबंधों के चलते संबंधित भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण, पुनर्वास अथवा विकास कार्य करना संभव नहीं है।
