महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: सूखा राहत कार्यों के लिए होगा DPDC फंड का इस्तेमाल, छोटे भूखंडों की सीमा बढ़ी

Maharashtra Land Rules: महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने सूखे से निपटने के लिए DPDC फंड का उपयोग जल संरक्षण और चारे के लिए करने का निर्णय लिया है। साथ ही छोटे सरकारी भूखंडों के आवंटन की सीमा भी बढ़ाई गई है।
DPDC funds will be used for drought relief operations
चंद्रशेखर बावनकुलेसोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights

  • सूखा राहत के लिए डीपीडीसी फंड का इस्तेमाल होगा।

  • बंद जलापूर्ति योजनाएं शुरू, टैंकरों पर GPS अनिवार्य।

  • सरकारी भूखंड आवंटन सीमा 10% से बढ़कर 25%।

Maharashtra Cabinet Decisions Drought Relief: महाराष्ट्र में सूखे की बढ़ती गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत उपायों के लिए जिला योजना विकास समिति (डीपीडीसी) के फंड के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब इस निधि का उपयोग सीमेंट सड़कों के निर्माण के बजाय जल संरक्षण, खेतों तक सड़क बनाने, चारे की व्यवस्था और सूखा निवारण के अन्य कार्यों के लिए किया जाएगा।

इसके साथ ही बकाया बिजली बिलों के कारण बंद पड़ी जलापूर्ति योजनाओं को फिर शुरू करने, पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने और पानी के टैंकरों पर जीपीएस निगरानी अनिवार्य करने का फैसला भी लिया गया है।

मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक के बाद इन फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सूखे से निपटने के लिए विभिन्न उपायों पर चर्चा की गई और कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।

बावनकुले ने बताया कि राज्य में कई जलापूर्ति योजनाएं बिजली बिलों के बकाया होने के कारण बंद पड़ी हैं। इन योजनाओं को दोबारा शुरू करने के लिए ऊर्जा और जलापूर्ति विभाग मिलकर एक कार्यप्रणाली तैयार करेंगे।

इसके माध्यम से राज्यभर में बंद पड़ी योजनाओं को फिर से चालू करने की व्यवस्था की जाएगी। सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सीधे जिलाधिकारियों को दी जाएगी। इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाएगी। संबंधित जिले में पशुओं की जरूरत के अनुसार चारे की व्यवस्था जिलाधिकारी करेंगे।

कृषि विभाग इस काम की कार्यकारी एजेंसी होगा, जबकि पशुपालन विभाग प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेगा। सरकार ने जलाशयों, तालाबों और जल संरक्षण संरचनाओं के आसपास चारा उगाने का भी निर्णय लिया है जो किसान चारे की खेती करेंगे, उनसे चारा खरीदने की व्यवस्था भी की जाएगी।

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छोटे सरकारी भूखंडों के आवंटन की सीमा बढ़ी

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 3 महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए है। सरकार ने लैंड-लॉक्ड और अप्रयुक्त जमीनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए छोटे सरकारी भूखंडों के आवंटन की सीमा बढ़ा दी है।

इसके साथ ही, संवैधानिक पद पर लगातार 25 वर्षों तक जनसेवा पूरी करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया तथा बुलढाना स्थित श्री संत गजानन महाराज संस्थान को यात्रा स्थल विकास हेतु स्थायी निर्माण की मंजूरी प्रदान की गई है।

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महाराष्ट्र भूमि राजस्व नियम, 1971 के प्रावधानों में संशोधन करते हुए संकरे और निर्माण के लिए अयोग्य भूखंडों के वितरण की सीमा को सटे हुए प्लॉट धारक के कुल क्षेत्रफल के 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है।

जनप्रतिनिधियों की मांग पर यह छूट दी गई है। जिन भूखंडों पर निर्माण अनुज्ञेय नहीं होगा उन्हें खुला रखना अनिवार्य होगा। भविष्य में विकास नियमों में बदलाव होने पर शासन के पास प्रचलित दरों के अनुसार अंतर की राशि वसूलने का अधिकार रहेगा।

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