महाराष्ट्र स्वास्थ्य बजट (डिजाइन फोटो)
Maharashtra Health Budget And Environment Fund : ‘2047 के विकसित महाराष्ट्र’ का खाका तैयार करने में जुटे ‘इंफ्रा मैन’ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में बजट पेश किया। राज्य के भारी भरकम बजट में जहां रेल,रोड इंफ्रा,पर्यटन एवं औद्योगिक विकास पर ज्यादा ध्यान दिया गया है, वहीं स्वास्थ्य सेवा और पर्यावरण जैसे अत्यंत आवश्यक मदों के लिए कम निधी का प्रावधान किया गया है।
राज्य के बजट में हेल्थ डिपार्टमेंट के लिए 5,980 करोड़ रुपये और मेडिकल एजुकेशन के लिए 2,617.68 करोड़ रुपये दिए गए हैं। हालांकि पिछले साल के मुकाबले हेल्थ डिपार्टमेंट के लिए ज़्यादा फंड दिए गए हैं, लेकिन बजट के साइज़ को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मात्र दो परसेंट का ही प्रोविज़न किया गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के मानक के अनुसार, यह प्रोविज़न GDP का कम से कम चार परसेंट होना चाहिए।
गौरतलब है कि पूरे राज्य के मुकाबले अकेले मुंबई मनपा का इस साल का हेल्थ बजट 7456.80 करोड़ है। हेल्थ डिपार्टमेंट के बड़े अधिकारियों और सीनियर डॉक्टरों का कहना है कि हेल्थ डिपार्टमेंट को सिर्फ़ 5,980 करोड़ रुपये का बजट ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है,क्योंकि हेल्थ डिपार्टमेंट ने बजट में 18,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद जताते हुए ज़रूरी प्रपोजल और प्लान फाइनेंस डिपार्टमेंट को सौंपे थे।
बताया गया कि बजट में 1500 करोड़ रुपये का प्रोविजन महात्मा फुले जन आरोग्य योजना के लिए है। इससे हेल्थ डिपार्टमेंट की अन्य योजनाओं को लागू करने के लिए ज़्यादा फंड नहीं होंगे। प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शियरी हेल्थ सर्विसेज़ को बढ़ाने की योजना है,लेकिन इतने बड़े राज्य के लिए बजट में जरूरत से कम निधि का प्रावधान चकित करने वाला है।
देश में सबसे ज्यादा शहरीकरण वाले राज्यों में महाराष्ट्र नंबर एक पर है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं कहा है, कि 2047 तक महाराष्ट्र की 70 प्रतिशत तक आबादी शहरों में रहने लगेगी। राज्य में बढ़ते शहरीकरण,आद्योगीकरण से वन एवं पेड़ घट रहे हैं और प्रदूषण बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने वन क्षेत्र बढ़ाने अगले 5 साल में 300 करोड़ पेड़ लगाने का प्लान बनाया है।
राज्य में मानसून व पर्यावरण की स्थिति लगातार गिरती जा रही है। साल 2026 में भी मानसून विपरीत परिणाम होने वाला है। ऐसे में सरकार ने पर्यावरण व वातावरण बदलाव की उपाययोजनाओं के लिए बजट में मात्र 254.80 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है, जो राज्य की स्थिति और वैश्विक मानकों के अनुसार काफी कम है। ऐसा अनेक संस्थाओं का कहना है। राज्य में वन विभाग के लिए 2607 करोड़ का प्रावधान किया गया है। राज्य का वन क्षेत्र लगातार घट रहा है। इसकी उपाययोजना को लेकर सरकार को बड़ा प्रयास करना होगा।
जानकारों के अनुसार महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य में मेडिकल शिक्षा के लिए भी ज्यादा बजट की जरूरत है। राज्य में 35 सरकारी कॉलेज चल रहे हैं,और 11 नए मंज़ूर कॉलेजों का कंस्ट्रक्शन अलग-अलग स्टेज पर है। बढ़ती आबादी,प्रदूषण को देखते हुए ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा को अपग्रेड करने की जरूरत है। हाल ही में राज्य में अर्बन हेल्थ कमिश्नरेट भी बनाया गया है। कैंसर, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी बीमारियों का जल्दी पता लगाने के लिए एशियन बैंक की मदद से हर साल ग्रामीण इलाकों में स्क्रीनिंग कैंपेन चलाने के लिए 4.5 हजार करोड़ रुपये की ‘प्रोग्रेस स्कीम’ प्रस्तावित की गई है।
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प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और महात्मा फुले जन आरोग्य योजना के तहत इलाज की संख्या 1,356 से बढ़ाकर 2,399 कर दी गई है। अस्पतालों की संख्या भी 1,792 से बढ़ाकर 4,537 कर दी गई है। पब्लिक हेल्थ में अच्छे सुधार के लिए, AIIMS और IIM की तरह हाई-क्वालिटी ट्रेनिंग और रिसर्च के लिए एम्स की तरह नागपुर में एक ‘महाराष्ट्र पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूट’ बनाया जाएगा। लेकिन दूसरी तरफ डॉक्टरों, नर्सों और दूसरे मैनपावर की कमी से भी हेल्थ डिपार्टमेंट जूझ रहा है।