Maharashtra News: राज्य सरकार द्वारा समयसमय पर किए गए विभिन्न उपायों के चलते राज्य में कुपोषित बच्चों की संख्या में चरणबद्ध तरीके से कमी आई है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, वर्ष 2023 में जहां 80,248 अत्यंत कुपोषित बच्चे थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 13,321 रह गई है।
हालांकि, राज्य के दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों के साथसाथ मुंबई जैसे बड़े शहरों की झुग्गी बस्तियों में भी कुपोषित बच्चों के पाए जाने से सरकार की चिंता बढ़ी है। नंदुरबार, गड़चिरोली, मेलघाट, पालघर, यवतमाल और वाशिम जैसे क्षेत्रों में अत्यंत कुपोषित बच्चों की संख्या अधिक है। वहीं नाशिक, धुलिया, चंद्रपुर और रायगड़ के कुछ हिस्सों में भी कुपोषण के मामले सामने आए हैं।
इसके अलावा नागपुर, पुणे और मुंबई की झोपड़पट्टियों में भी कुपोषित बच्चे पाए गए हैं। कुपोषण के प्रमुख कारणों में गरीबी, भोजन की कमी, अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं, अस्वच्छता, पलायन और गलत खानपान की आदतें शामिल हैं। केंद्र सरकार की एकीकृत बाल विकास सेवा आईसीडीएस योजना के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को विभिन्न सेवाएं प्रदान करती हैं।
पोषण ट्रैकर प्रणाली का उपयोगइन सेवाओं की निगरानी के लिए पोषण ट्रैकर प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें बच्चों का वजन और ऊंचाई हर महीने दर्ज की जाती है। महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव डॉ. अनुप कुमार यादव के अनुसार, विभाग के प्रयासों और मंत्री आदिती तटकरे द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं के कारण कुपोषण में कमी आई है। इसके अलावा, बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए ऐप के माध्यम से आपूर्ति को तेज किया गया है। साथ ही बच्चों को मिलेट आधारित आहार देने की भी योजना बनाई जा रही है।