मुंबई में 99 साल की लीज वाली जमीनों पर ऐतिहासिक फैसला, स्टांप ड्यूटी घटी, फ्री-होल्ड के लिए 60% सहमति ही काफी
Mumbai Land Policy: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई में लीज की जमीनों को फ्री-होल्ड करने के नियम आसान किए हैं। आवासीय पर स्टांप ड्यूटी 0.5% की गई और अनिवार्य सहमति को 100% से घटाकर 60% कर दिया।
- Written By: रूपम सिंह
हाउसिंग सोसायटिया (सोर्स- सोशल मीडिया)
Mumbai Leasehold to Freehold: महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने मुंबई और उसके उपनगरों में रहने वाले लाखों नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए 99 साल की लीज पर दी गई जमीनों के संबंध में एक बड़ा फैसला किया है। इस ऐतिहासिक निर्णय के तहत अब हाउसिंग सोसायटियों की जमीनों को वर्ग-2 (लीज-होल्ड) से वर्ग-1 (फ्री-होल्ड) में बदलना बेहद आसान हो गया है।
सरकार ने पंजीकरण के दौरान लगने वाली स्टांप ड्यूटी में भारी कटौती करने के साथ ही नियमों को भी सरल बनाया है। ऐसा माना जा रहा है कि इससे मुंबई महानगर के साथ-साथ आसपास के एमएमआर क्षेत्र की हजारों सहकारी गृह निर्माण सोसायटियों और आम फ्लैट धारकों को भी सीधा वित्तीय व कानूनी लाभ मिलना तय हो गया है।
कुलाबा-मरीन ड्राइव की सोसायटियों को सीधा लाभ
सरकार के नए नियमों के अनुसार, भाड़े पट्टे (लीज) की जमीनों के पंजीकरण के लिए लगने वाले भारी-भरकम स्टांप शुल्क को अब पूरी तरह से तर्कसंगत बना दिया गया है। अब आवासीय संपत्तियों के लिए केवल 0.5 प्रतिशत और व्यावसायिक संपत्तियों के लिए अधिकतम 1.5 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी ही ली जाएगी। इस फैसले से मुंबई की सोसायटियों को करोड़ों रुपए की सीधी बचत होगी।
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उदाहरण के तौर पर नरीमन पॉइंट की मित्तल चेंबर्स सोसायटी को जहां पहले पुराने नियमों के कारण 101 करोड़ रुपए से अधिक का शुल्क देना पड़ रहा था, वहीं अब नए नियमों के अनुसार, उन्हें महज 10 लाख 68 हजार रुपए ही चुकाने होंगे। कुलाबा और मरीन ड्राइव जैसी प्राइम लोकेशन की सोसायटियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
अब 100% सहमति की जरूरत नहीं
सोसायटियों की जमीनों को फ्री-होल्ड यानी वर्ग-1 में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को गति देने के लिए सरकार ने एक और बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। अब किसी भी गृहनिर्माण संस्था की जमीन का वर्ग बदलने के लिए 100 प्रतिशत निवासियों की सहमति की अनिवार्य शर्त को खत्म कर दिया गया है।
सरकार की नई घोषणा के अनुसार, अब यदि केवल 60 प्रतिशत निवासी भी इसके लिए अपनी सहमति दे देते हैं, तो जमीन को वर्ग-1 में रूपातरित किया जा सकेगा। इस नियम के लागू होने से सोसायटियों के भीतर होने वाले आपसी विवाद कम होंगे और विकास के रास्ते में आने वाली प्रशासनिक अड़चनें पूरी तरह दूर हो जाएंगी।
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विकास को मिलेगी अब नई रफ्तार
यह कल्याणकारी फैसला केवल दक्षिण मुंबई तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका समान लाभ मुंबई के सभी उपनगरों और एमएमआर क्षेत्र की सोसायटियों को भी समान रूप से मिलेगा। बीबीडी रिक्लेमेशन क्षेत्र के निवासियों के लिए साल 2015 से पहले के फ्लैट ट्रांसफर पर लगने वाले नजराना शुल्क को पूरी तरह से माफ कर दिया गया है। सरकार के इस चौतरफा फैसले से मुंबई और उपनगरों में सालों से रुके हुए रीडेवलपमेंट (पुनर्विकास) के प्रोजेक्ट्स को नई रफ्तार मिलेगी।
- साल की लीज वाली सोसायटियों को स्टांप शुल्क में बड़ी राहत
- निवासी संपत्ति पर अधिकतम 0.5 प्रतिशत, व्यावसायिक पर 1.5 प्रतिशत शुल्क
- मितल चैंबर्स का शुल्क 101 करोड़ से घटकर 10 लाख 68 हजार रुपए
- वर्ग-2 से वर्ग-1 करने के लिए अब 100 की जगह 60 प्रतिशत सहमति काफी
- बीबीडी रिक्लेमेशन के लगभर डेढ़ हजार सदनिकाधारकों को 2015 से पहले के हस्तांतरण पर नजराना माफ।
