लाडली को डबल झटका, अब 65 लाख फर्जी लाभार्थियों से सरकार वसूलेगी पैसा

Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र सरकार की ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण’ योजना में ई-केवायसी और सत्यापन के बाद 65 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित किया गया है।
ladki bahin yojana fake beneficiaries recovery ekyc maharashtra
Ladki Bahin Yojana, (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Updated on

E-KYC Verification: महाराष्ट्र की महायुती सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण' (लाडली बहन) योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार द्वारा अनिवार्य की गई ई-केवायसी प्रक्रिया और गहन सत्यापन के बाद लाभार्थियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

रिपोर्टों की मानें तो योजना के प्रारंभ में पंजीकृत 2।46 करोड़ महिलाओं में से अब लगभग 65 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित कर बाहर कर दिया गया है। इस छंटनी के बाद अब लाभार्थियों की कुल संख्या घटकर 1।81 करोड़ रह गई है। इतना ही नहीं सरकार अब अपात्र लात्रार्थी महिलाओँ से पैसा वापस लेने की तैयारी कर रही है

विशेष सत्यापन अभियान

राज्य सरकार ने वर्ष 2025 में अपात्र लाभार्थियों की पहचान के लिए विशेष सत्यापन अभियान शुरू किया था। ई-केवायसी और अन्य सुधारों के लिए अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तय की गई थी, जिसे अब और आगे न बढ़ाने का फैसला लिया गया है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, जिन 65 लाख महिलाओं को जांच में अपात्र पाया गया है, उनसे अब तक दिए गए लाभ की वसूली करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस कड़ाई का असर योजना के बजट पर भी पड़ा है। शुरुआत में जिस योजना के लिए 45,000 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट रखा गया था, उसे 2026 के बजट में घटाकर काफी कम कर दिया गया है।

लंबित किस्तों पर अनिश्चितता

योजना की लाभार्थी महिलाओं को मार्च महीने से अपनी किस्तों का इंतजार है। मई का महीना शुरू होने के बावजूद मार्च और अप्रैल की राशि खाते में नहीं आई है। हालांकि, चर्चा है कि सरकार रुकी हुई किस्तों के साथ कुल 4500 रुपए एक साथ भेज सकती है, लेकिन इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

दूसरी ओर, सोलापुर सहित कई जिलों में हजारों महिलाओं ने ई-केवायसी न होने के कारण अपना लाभ खो दिया है। महिलाओं ने प्रशासन से ई-केवायसी की समय सीमा बढ़ाने की मांग की है। इस विषय पर 15 या 16 मई को महिला एवं बाल कल्याण विभाग की उच्च स्तरीय बैठक होने वाली है, जिसमें सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जताई जा रही है।

Navbharat Live
navbharatlive.com