कुर्ला BEST बस हादसा: 9 मौतों के आरोपी ड्राइवर संजय मोरे को बॉम्बे HC से मिली जमानत, कोर्ट ने कही यह बड़ी बात
Mumbai BEST Bus Accident: दिसंबर 2024 के भीषण कुर्ला बस हादसे में 9 लोगों की जान लेने वाले आरोपी ड्राइवर संजय मोरे को बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने इसे लापरवाही का मामला माना है।
- Written By: आकाश मसने
कुर्ला बेस्ट बस हादसा, इनसेट- आरोपी ड्राइवर संजय मोरे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Kurla BEST Bus Accident Sanjay More Bail: कुर्ला रेलवे स्टेशन के पास हुए उस दर्दनाक बस हादसे के करीब 15 महीने बाद, आरोपी बेस्ट (BEST) बस ड्राइवर संजय मोरे को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दिसंबर 2024 में हुए इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई थी और 37 लोग घायल हुए थे। न्यायमूर्ति आर.एम. जोशी की एकल पीठ ने 30 मार्च को संजय मोरे की जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
क्या था पूरा मामला?
9 दिसंबर 2024 को कुर्ला रेलवे स्टेशन के पास संजय मोरे द्वारा चलाई जा रही एक इलेक्ट्रिक बेस्ट बस अनियंत्रित होकर पैदल यात्रियों और अन्य वाहनों से टकरा गई थी। इस भीषण टक्कर में 22 वाहन क्षतिग्रस्त हुए थे और मौके पर चीख-पुकार मच गई थी। पुलिस ने मोरे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था, जिसमें गैर-इरादतन हत्या जैसे गंभीर आरोप शामिल थे।
अदालत में बचाव पक्ष की दलीलें
बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान संजय मोरे के वकीलों ने तर्क दिया कि यह मामला ‘गैर-इरादतन हत्या’ का नहीं बल्कि ‘लापरवाही से हुई मौत’ (Section 106, BNS) का है। बचाव पक्ष ने निम्नलिखित मुख्य बिंदु रखे।
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अपर्याप्त ट्रेनिंग: अनुबंध के अनुसार ड्राइवर को 7 दिन की ट्रेनिंग मिलनी चाहिए थी, लेकिन उसे केवल 3 दिन की ट्रेनिंग दी गई, वह भी सिर्फ पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए।
नशे का अभाव: फॉरेंसिक रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि हादसे के वक्त ड्राइवर ने किसी भी प्रकार की शराब या नशीले पदार्थ का सेवन नहीं किया था।
लंबी हिरासत: आरोपी पिछले 15 महीनों से जेल में है और मुकदमे की सुनवाई अभी शुरू होनी बाकी है, जिसमें कुल 96 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं।
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कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह घटना प्रथम दृष्टया ‘लापरवाही’ (Negligence) के अधिक करीब प्रतीत होती है। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि अक्टूबर में आरोप तय होने के बावजूद अभी तक एक भी गवाह से पूछताछ नहीं हुई है। ट्रायल पूरा होने में लगने वाले संभावित समय और ड्राइवर की लंबी हिरासत को आधार मानते हुए कोर्ट ने उसे जमानत दे दी।
इससे पहले सत्र न्यायालय ने RTO की उस रिपोर्ट के आधार पर जमानत खारिज कर दी थी, जिसमें कहा गया था कि बस में कोई यांत्रिक खराबी या ब्रेक फेल होने जैसी समस्या नहीं थी।
