KEM Hospital का नाम बदलने के प्रस्ताव पर बवाल, रेजिडेंट डॉक्टरों ने जताया कड़ा विरोध

मुंबई के KEM Hospital का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही विवाद खड़ा हो गया है। रेजिडेंट डॉक्टरों ने इस फैसले का विरोध करते हुए अस्पताल की मूल समस्याओं पर ध्यान देने की मांग की है।
KEM Hospital MRI Service Restoration News
केईएम अस्पताल (सौ. सोशल मीडिया )
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KEM Hospital Name Change Controversy: कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा की पहल पर परेल स्थित केईएम अस्पताल का नाम बदल कर 'कौशलश्रेष्ठ एकलव्य स्मारक' अस्पताल' रखने के प्रस्ताव को बीएमसी की स्वास्थ्य समिति की बैठक में मंजूरी दी गई है।

अब यह प्रस्ताव सुझाव के लिए मुंबई मनपा प्रशासन के पास भेजा गया है। लेकिन इस बीच अब केईएम के रेजिडेंट डॉक्टरों को एसोसिएशन ने इस ऐतिहासिक अस्पताल का नाम बदलने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इस कदम को बहुत निराशाजनक और स्वीकार न करने योग्य बताया है।

शनिवार को जारी एक बयान में एसोसिएशन ने इस बात पर जोर दिया कि केईएम हॉस्पिटल सिर्फ एक नाम से कहीं ज्यादा है। यह अस्पताल एक विरासत वाली संस्था है जिसका अपना एक एकेडमिक इतिहास रहा है।

नाम बदलने के फैसले में सलाह मशविरा जरूरी

कई दशकों से यह अस्पताल पब्लिक हेल्थकेयर, मेडिकल एजुकेशन और मरीजों की सेवा में बेहतरीन होने का प्रतीक रहा है। इसकी पहचान डॉक्टरों, छात्रों, पुराने छात्रों, स्टाफ और मरीजों की पीढ़ियों के लिए बहुत मायने रखती है। एसोसिएशन ने इस बात पर जोर दिया कि इतने मशहूर संस्थान का नाम बदलने के किसी भी फैसले में खास स्टेकहोल्डर्स, खासकर रेजिडेंट डॉक्टरों से सलाह-मशविरा करना जरूरी है, जो हॉस्पिटल के कामकाज के मुख्य आधारों में से एक हैं।

एक मशहूर संस्थान है केईएम अस्पताल

  • माई का कहना है कि सिर्फ हॉस्पिटल का नाम बदलने से संस्था के सामने आने वाली बड़ी चुनौतियों का हल नहीं होगा। एसोसिएशन ने हॉस्टल का ठीक से इंफ्रास्ट्रक्चर न होना, बार-बार लिफ्ट खराब होना और स्टाइपेंड का अनियमित मिलना जैसी मौजूदा चिताओं पर जोर दिया।
  • ऐसे समय में जब ये मुद्दे महत्वपूर्व है, तो सिर्फ सिम्बॉलिक बदलावों के बजाय हेल्थ केयर सिस्टम को मजबूत करने और काम करने की स्थिति में सुधार करने पर ध्यान देना चाहिए।
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