मुंबई में Government KEM Hospital में हाईटेक सुविधा, 5 मिनट में होगा ब्रेस्ट कैंसर का पता

मुंबई के KEM Hospital में 3D डिजिटल टोमोसिंथेसिस मैमोग्राफी मशीन शुरू की गई है। अब स्तन कैंसर की जांच अधिक सटीक, तेज और किफायती दरों पर सरकारी स्तर पर उपलब्ध होगी।
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स्तन कैंसर की जांच (सौ. सोशल मीडिया )
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KEM Hospital 3D Mammography Detection: केईएम अस्पताल में स्तन कैंसर की जांच के क्षेत्र में एक बड़ा तकनीकी बदलाव सामने आया है।

अस्पताल में अत्याधुनिक 3D डिजिटल टोमोसिंथेसिस मैमोग्राफी मशीन शुरू की गई है, जिससे अब मरीजों को अधिक सटीक और तेज जांच सुविधा सरकारी स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेगी।

यह तकनीक अब तक मुख्य रूप से निजी अस्पतालों तक सीमित थी, लेकिन अब आम नागरिक भी कम लागत में इसका लाभ उठा सकेंगे। नई मशीन की मदद से स्तन कैंसर का पता शुरुआती चरण में ही लगाया जा सकता है, जिससे समय पर इलाज शुरू करना संभव होगा और मरीजों के ठीक होने की संभावना भी बढ़ेगी।

स्तन कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि

विशेषज्ञों के अनुसार, यह मशीन पारंपरिक 2D मैमोग्राफी की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी है। यह बेहद छोटे, लगभग 70 माइक्रोन तक के ट्यूमर का भी पता लगा सकती है। जांच प्रक्रिया केवल 5 मिनट में पूरी हो जाती है, जबकि इसमें रेडिएशन का स्तर भी करीब 30 प्रतिशत तक कम होता है, जिससे मरीजों के लिए यह ज्यादा सुरक्षित विकल्प बनता है।

इस तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी उपयोग किया गया है, जिससे रिपोर्ट जल्दी और अधिक सटीक मिलती है। साथ ही, बायोप्सी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया भी कम समय, लगभग 13 मिनट में पूरी की जा सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि महाराष्ट्र में स्तन कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2023 में राज्य में 33,000 से अधिक नए मामले सामने आए, जिनमें मुंबई जैसे शहरी क्षेत्रों का योगदान अधिक रहा।

ऐसे में यह नई सुविधा मरीजों के लिए काफी राहत लेकर आई है। डॉक्टरों ने महिलाओं को नियमित जांच कराने की सलाह दी है। विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को हर साल मैमोग्राफी करवानी चाहिए, जबकि जिनके परिवार में कैसर का इतिहास है, उन्हें 35 वर्ष की उम्र के बाद ही नियमित जांच शुरू कर देनी चाहिए।

नई तकनीक से महिलाओं को अब मिलेगी राहत

एक्स रे विभाग की प्रमुख डॉक्टर हेमांगिनी ठक्कर ने बताया कि हर महिला को 40 वर्ष की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार जांच करवाना जरूरी है। जिन महिलाओं के परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास है, उन्हें 35 वर्ष के बाद नियमित जांच करवानी चाहिए। केईएम में उपलब्ध इस नई तकनीक से महिलाओं को काफी राहत मिलने की संभावना है।

2001 से 'स्तनरक्षा' नामक विशेष ओपीडी विभाग

केईएम अस्पताल की डीन डॉ। संगीता रावत ने बताया कि 3D डिजिटल टोमोसिंथेसिस मैमोग्राफी मशीन का उपयोग मुंबई के कुछ गिने-चुने बड़े निजी अस्पतालों के साथ-साथ टाटा अस्पताल में किया जाता था। लेकिन अब केईएम अस्पताल में भी इस मशीन के माध्यम से उपचार किया जा रहा है।

आरसीसीआई फाउंडेशन की सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) फंड से यह मशीन केईएम अस्पताल में उपलब्ध कराई गई है। केईएम जैसे सरकारी अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध होने से आम मरीजों को उच्च दर्जे की जांच किफायती दरों में मिल सकेगी। केईएम अस्पताल में डॉ। शिल्पा राव के नेतृत्व में वर्ष 2001 से 'स्तनरक्षा' नामक विशेष ओपीडी विभाग शुरू है, जो स्तन कैंसर के उपचार के लिए कार्यरत है।

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