महाराष्ट्र में सड़क हादसों पर लगाम: जनवरी में मौतों में 8% की बड़ी गिरावट, इन 10 जिलों में दिखा सुरक्षा का दम

Maharashtra Road Safety News: महाराष्ट्र परिवहन विभाग के सख्त उपायों व AI तकनीक के इस्तेमाल से जनवरी 2026 में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 8.05% की कमी आई है। जानें किन जिलों में सुधार हुआ।
Maharashtra Road Accident Statistics 2026
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Maharashtra Road Accident Statistics 2026: महाराष्ट्र की सड़कों पर अब सफर पहले से अधिक सुरक्षित होता नजर आ रहा है। राज्य परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा को लेकर लागू किए गए कड़े नियमों और आधुनिक तकनीक के समन्वय के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में पिछले वर्ष के मुकाबले 8.05% की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

हादसों में 2 प्रतिशत की कमी आई

जनवरी 2025 में जहां राज्य भर में सड़क हादसों में 1,427 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, वहीं जनवरी 2026 में यह आंकड़ा घटकर 1,312 रह गया है। यानी परिवहन विभाग के प्रयासों से एक महीने में 115 लोगों की जान बचाने में सफलता मिली है। कुल दुर्घटनाओं की संख्या में भी 2% की कमी आई है, जो 3,164 से गिरकर 3,100 पर आ गई है।

इन जिलों ने पेश की मिसाल

  • सड़क सुरक्षा के मोर्चे पर कुछ जिलों का प्रदर्शन बेहद सराहनीय रहा है।
  • नंदुरबार: मौतों में 50% की भारी कमी।
  • सोलापुर शहर और वाशिम: 36% की गिरावट।
  • सिंधुदुर्ग: 29% की कमी।
  • वर्धा और धाराशिव: क्रमशः 28% और 24% का सुधार।
  • नागपुर और नांदेड़: 21% की गिरावट दर्ज की गई।

50% हादसे कम करने का लक्ष्य

अतिरिक्त परिवहन आयुक्त भरत कालस्कर के अनुसार, विभाग का लक्ष्य 2030 तक सड़क हादसों को 50% तक कम करना है। इसके लिए राज्य और जिला स्तर पर समर्पित 'रोड सेफ्टी सेल' बनाए गए हैं। हर जिले के लिए एक अलग रोड सेफ्टी प्लान तैयार किया गया है और इसे लागू किया जा रहा है। एक्सीडेंट की संभावना वाले ‘ब्लैक स्पॉट’ में सुधार किए जा रहे हैं। विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नकेल कसने के लिए 332 प्रवर्तन टीमें तैनात की हैं। इंटरसेप्टर वाहनों और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कैमरों की मदद से जनवरी में बड़े पैमाने पर चालान काटे गए।

  • बिना हेलमेट: 89,651 मामले (चालक) और 13,348 मामले (पीछे बैठी सवारी)।
  • ओवरस्पीडिंग: 8,520 केस।
  • बिना सीट बेल्ट: 8,024 मामले।

हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर और 'गोल्डन आवर' पर जोर

सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए राज्य के 25,000 किमी हिस्से पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लगाया जा रहा है। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर इसके सफल प्रयोग से हादसों में 19% की कमी आई है। इसके अलावा, राज्य में 53 सरकारी और 13 निजी ऑटोमेटेड व्हीकल टेस्टिंग स्टेशन (ATS) शुरू किए जा रहे हैं ताकि अनफिट गाड़ियां सड़कों पर न दौड़ें।

हादसे के शिकार लोगों को बचाने के लिए केंद्र की 'PM राहत' स्कीम के तहत 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज (7 दिनों तक) सुनिश्चित किया गया है। साथ ही, घायलों की मदद करने वाले 'जीवन दूतों' को 25,000 रुपये का इनाम देने का प्रावधान भी किया गया है।

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