1 हजार साल की बरसात झेल सकेगा मुंबई-पुणे कनेक्टिंग लिंक! IIT-Bombay ने दी ये सलाह, गड्ढों से भी मिलेगी निजात

IIT Bombay Report: मुंबई-पुणे कनेक्टिंग लिंक पर बारिश से बने गड्ढों के बाद IIT-Bombay ने 1000 साल की बारिश झेलने लायक डिजाइन, बेहतर ड्रेनेज और भूस्खलन रोकने के उपाय सुझाए।
IIT Bombay Report On Mumbai Pune Connecting Link 1000 Year In Heavy Rain Design
मुंबई-पुणे कनेक्टिंग लिंक (सोर्स: सोशल मीडिया)
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IIT Bombay Report On Mumbai Pune Connecting Link: मुंबई, पिछली 1 मई को महाराष्ट्र दिवस पर जोरशोर से लोकार्पित मुंबई-पुणे कनेक्टिंग लिंक पर दो माह में ही भारी बरसात के कारण पड़े गड्ढों की वजह से सरकार को काफी किरकिरी का सामना करना पड़ा है।

लगातार हो रही भारी बारिश के बाद मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के कनेक्टिंग लिंक पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए। सबसे ज्यादा गड्ढे लोनावला से खोपोली और सुरंगों के पास वाले हिस्से में बन गए। कई जगहों पर सड़क का एक हिस्सा पूरी तरह धंस गया। हालांकि एमएसआरडीसी ने तत्काल उसे दुरुस्त करने का काम शुरू किया।

बॉम्बे आईआईटी ने बनाई रिपोर्ट

मानसून के दौरान उस पहाड़ी इलाके में लगातार होने वाली बरसात को देखते हुए IIT Bombay ने एक्सप्रेस के जरूरी हिस्से Connecting Link को और मजबूत बनाने के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट MSRDC को सौंपी है। इस रिपोर्ट के अनुसार 100 साल के बजाय 1000 साल की बारिश का स्टैंडर्ड अपनाने की सलाह दी गई है। वैसे मुंबई पुणे कनेक्टिंग लिंक को 1 दिन में 1,249mm बारिश झेल सकने लायक बनाने का दावा किया गया है।

संस्थान ने सिफारिश की है कि इस पूरे सेक्शन को इस तरह डिजाइन किया जाए कि वह एक दिन में 1,249mm तक बारिश झेलने में सक्षम हो। इसके लिए मौजूदा 100 साल के रिटर्न पीरियड वाले डिजाइन बेंचमार्क को बढ़ाकर 1000 साल की बारिश की घटना के हिसाब से अपग्रेड करने की जरूरत बताई गई है।

IIT-Bombay ने दिए ये बड़े सुझाव !

पहाड़ी से बहने वाले पानी को डायवर्ट करने का सुझाव देते हुए कहा गया है कि सुरंग के ऊपर वाली पहाड़ी से बारिश का पानी सीधे Connecting Link पर गिरता है। इसे रोकने के लिए पहाड़ी की ढलान पर ड्रेनेज चैनल और डायवर्जन स्ट्रक्चर बनाए जाएं, ताकि पानी को नियंत्रित कर सुरक्षित दिशा में निकाला जा सके।

ढीले बोल्डरों को हाई-टेंसाइल स्टील मेष से सुरक्षित करने की सिफारिश की गई है।

पहाड़ी पर मौजूद ढीले पत्थरों और चट्टानों के गिरने का खतरा सबसे ज्यादा है। IIT ने सुझाव दिया है कि इन बोल्डरों को हाई-टेंसाइल स्टील मेष और रॉक एंकर की मदद से बांधा जाए। इससे भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं कम होंगी। तीसरे मुख्य सुझाव में खड़ी ढलानों को टेरेस में बदलने कहा गया है।

Expressway के आसपास की तेज ढलानों को सीढ़ीदार यानी टेरेस फॉर्मेशन में बदला जाए। इससे मिट्टी का कटाव रुकेगा और पानी का बहाव धीमा होगा, जिससे लैंडस्लाइड का जोखिम घटेगा। 13 किमी के इस Connecting Link पहाड़ी और सुरंग वाला इलाका है, इसलिए यहां जलभराव और चट्टान गिरने का खतरा सामान्य सड़क से कहीं ज्यादा है।

क्लाइमेट चेंज के दौर में जरूरी कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि क्लाइमेट चेंज के कारण अब 100 साल में एक बार आने वाली बारिश भी हर 2-3 साल में हो रही है। ऐसे में इंफ्रास्ट्रक्चर को नए मानकों के हिसाब से बनाना जरूरी हो गया है। IIT-Bombay की यह रिपोर्ट उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

रिपोर्ट का अध्ययन

MSRDC के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि IIT-Bombay की रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। रिपोर्ट में दिए गए तकनीकी सुझावों को चरणबद्ध तरीके से प्रोजेक्ट में शामिल किया जाएगा, ताकि Expressway भविष्य की चरम मौसमी घटनाओं के लिए तैयार रहे।

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