Mumbai News: मराठा आरक्षण के खिलाफ याचिकाओं पर होगी सुनवाई, उच्च न्यायालय ने किया विशेष पीठ का गठन
मुंबई उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के एक निर्देश के बाद मराठा आरक्षण प्रदान करने वाले कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए शुक्रवार को 3 न्यायाधीशों की विशेष पीठ का गठन किया।
- Written By: आंचल लोखंडे
मराठा आरक्षण के खिलाफ याचिकाओं पर होगी सुनवाई। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
मुंबई: मुंबई उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के एक निर्देश के बाद मराठा आरक्षण प्रदान करने वाले कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए शुक्रवार को 3 न्यायाधीशों की विशेष पीठ का गठन किया।
बता दें कि महाराष्ट्र की लगभग एक-तिहाई आबादी वाले मराठा समुदाय को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के प्रावधान वाला यह कानून पिछले साल लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक विमर्श के केंद्र में था।
3 न्यायाधीशों की विशेष पीठ का गठन
शुक्रवार को जारी किए गए एक नोटिस में उच्च न्यायालय ने बताया कि महाराष्ट्र राज्य में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण अधिनियम 2024 से संबंधित जनहित याचिकाओं और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई और फैसला करने के लिए न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे, न्यायमूर्ति एन जे जामदार और न्यायमूर्ति संदीप मार्ने की पूर्ण पीठ गठित की जाती है।
सम्बंधित ख़बरें
मुलुंड स्टेशन पर FOB गर्डर लॉन्चिंग के लिए 25-26 जुलाई को मेगा ब्लॉक, ये लोकल ट्रेनें रहेंगी रद्द
कर्जत-लोनावला घाट में तीसरी लाइन की बहाली जारी, मध्य रेलवे ने बढ़ाया ट्रेनों का रद्दीकरण व डायवर्जन
यूपी-बिहार जाने वाले यात्रियों को राहत, पश्चिम रेलवे ने इन स्पेशल ट्रेनों के फेरे बढ़ाए, देखें पूरी लिस्ट
आषाढ़ी एकादशी पर यात्रियों को राहत, मध्य रेल चलाएगी मिरज-दादर वन-वे स्पेशल ट्रेन, जानें रूट और टाइमिंग
मराठा पिछड़ा समुदाय नहीं है…
हालांकि नोटिस में उस तारीख का उल्लेख नहीं किया गया है कि किस दिन पीठ याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। पिछले वर्ष उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय की अध्यक्षता वाली एक पूर्ण पीठ ने इस कानून को इस आधार पर चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की थी कि मराठा पिछड़ा समुदाय नहीं है जिसे आरक्षण का लाभ मिल सके।
आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा पार
याचिकाओं में यह भी दावा करते हुए कहा कि महाराष्ट्र ने पहले ही आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा पार कर ली है। हालांकि, इस साल जनवरी में मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय का दिल्ली उच्च न्यायालय में तबादला हो जाने के बाद सुनवाई रुक गई थी। जिसक बाद उच्चतम न्यायालय ने 14 मई को बंबई उच्च न्यायालय को एक विशेष पीठ गठित करने और मामले की तत्काल सुनवाई करने का निर्देश दिया था।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
