350वीं शहादत वर्ष पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का नमन, गुरु तेग बहादुर को बताया ‘हिंद-दी-चादर’

Deputy CM Eknath Shinde ने श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहादत वर्ष पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को पूरे भारत की पहचान बताया।
Eknath Shinde
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Eknath Shinde Tribute To Guru Tegh Bahadur: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हिंद दी चादर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहादत की सालगिरह पर उनका अभिवादन किया है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने निडरता का संदेश दिया, वे न किसी को डरते हैं, न ही डर को मानते हैं।

इस महान क्रांतिकारी, धर्म रक्षक और इंसानियत की ढाल को मेरा कोटि-कोटि नमन है। यह पूरे भारत की पहचान और मानवाधिकार के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान का सम्मान है।

उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि 17वीं सदी में जब धार्मिक कट्टरता और अन्याय अपने चरम पर था, तब श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने निडर होकर जालिम ताकतों को चुनौती दी।

उन्होंने न केवल सिख धर्म के लिए, बल्कि पूरे भारत के कल्चरल और स्पिरिचुअल अस्तित्व के लिए कुर्बानी दी। इसीलिए उन्हें 'हिंद-दी-चादर' के ताज से सम्मानित किया गया है। इतिहास में ऐसी कई लड़ाइयां हुईं जहां अपने वजूद के लिए संघर्ष हुआ, लेकिन गुरुजी की लड़ाई 'दूसरों' के वजूद और धार्मिक आजादी के लिए लड़ी गई थी।

जब औरंगजेब ने कश्मीरी पंडितों पर धर्म बदलने की तलवार लटका दी थी, तब गुरुजी खुद आगे आए और इस नाइंसाफी को चुनौती दी। महाराष्ट्र व सिख परंपरा का पुराना नाताः शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र और सिख परंपरा का बहुत पुराना और गहरा रिश्ता है।

विभिन्न समुदायों को एक साथ लाने का प्रयास

  • शिंदे ने कहा कि हिंद दी चादर कार्यक्रम के लिए राज्य सरकार ने 10 डिजिटल रथ दिए हैं और 6000 से ज्यादा गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस उत्सव के जरिए सिंधी, बंजारा, वाल्मीकि, सिकलगर, लबाना, मोहियाल समेत सभी समुदायों को एक साथ लाने का काम किया जा रहा है। देश-विदेश में गुरुजी के महान कार्यों की जानकारी फैलाने के लिए एक 'स्टेट लेवल एग्जीबिशन कमेटी' बनाई गई है।
  • उपमुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र और पंजाब का रिश्ता खून से भी ज्यादा मजबूत है। महाराष्ट्र के संत नामदेव महाराज भागवत धर्म का झंडा पंजाब ले गए, सिख धर्म के पवित्र 'श्री गुरु ग्रंथ साहिब' में संत नामदेव के 61 पद शामिल हैं। पंजाब के घुमान में बिताए उनके 20 साल और वहां की जगह 'तपियाना साहिब' आज भी महाराष्ट्र-पंजाब की एकता की निशानी है।
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