संजय राउत ने ही हमें मातोश्री से निकाला था, अब क्यों बुला रहे हैं? उद्धव गुट की अपील पर भड़के गुलाबराव पाटिल

Gulabrao Patil Slams Sanjay Raut Matoshree Call: संजय राउत द्वारा मातोश्री बुलाने के बयान पर भड़के मंत्री गुलाबराव पाटिल, पूछा- जब निकाला था तो अब क्यों बुला रहे हो?
Gulabrao Patil Slams Sanjay Raut
मातोश्री के पुराने दिन याद कर भड़के गुलाबराव पाटिल; संजय राउत को दिया दो टूक जवाब (फोटो क्रेडिट-X)
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Gulabrao Patil Slams Sanjay Raut: महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से इस बात की चर्चाएं जोरों पर थीं कि क्या शिवसेना के दोनों धड़े (शिंदे गुट और उद्धव गुट) भविष्य में फिर कभी एक साथ आ सकते हैं। इस चर्चा को हवा तब मिली जब महायुति से नाराज चल रहे मंत्री अब्दुल सत्तार ने उद्धव गुट के वरिष्ठ नेता अंबादास दानवे से मुलाकात की थी। इस मुलाकात पर टिप्पणी करते हुए संजय राउत ने पुरानी बातों को भुलाकर बागियों के लिए 'मातोश्री' (उद्धव ठाकरे का निवास स्थान) के दरवाजे खुले होने के संकेत दिए थे। संजय राउत के इसी बयान पर अब एकनाथ शिंदे के बेहद भरोसेमंद सहयोगी गुलाबराव पाटिल ने करारा जवाब दिया है।

गुलाबराव पाटिल ने राउत को आड़े हाथों लेते हुए अतीत की कड़वाहट को एक बार फिर सार्वजनिक कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शिवसेना में हुए ऐतिहासिक विभाजन और उनके मातोश्री से बाहर निकलने की मुख्य वजह खुद संजय राउत ही थे।

'संजय राउत ने ही हमें निकाला था'

संजय राउत की कूटनीतिक अपील पर अपना तीव्र आक्रोश व्यक्त करते हुए गुलाबराव पाटिल ने पूछा, "आखिर अब हमें मातोश्री क्यों बुलाया जा रहा है? यह संजय राउत ही थे जिन्होंने अपनी जिद और गलत नीतियों के कारण हमें मातोश्री से बाहर निकलने पर मजबूर किया था। जब आपने खुद हमें वहां से धकेलकर निकाला, तो अब राजनीतिक लाभ के लिए दोबारा मातोश्री आने का न्योता क्यों दे रहे हैं?" पाटिल ने स्पष्ट किया कि शिंदे गुट के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाले नेता अब किस आधार पर पैच-अप की उम्मीद कर रहे हैं।

नेताओं की आपसी मुलाकातों को राजनीतिक चश्मे से देखना गलत

अब्दुल सत्तार और अंबादास दानवे के बीच हुई गुप्त बैठक के बाद महायुति और महाविकास अघाड़ी के भीतर शुरू हुई सियासी खींचतान पर भी पाटिल ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि राजनीति अपनी जगह है और व्यक्तिगत संबंध अपनी जगह होते हैं। सत्तार और दानवे आज भले ही अलग-अलग विचारधारा और दलों का प्रतिनिधित्व कर रहे हों, लेकिन वे दोनों पुराने दोस्त हैं और पिछले 25-25 साल से एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी रहे हैं। ऐसे में यदि दो पुराने मित्र आपस में बैठकर चाय पीते हैं या मुलाकात करते हैं, तो इसमें कुछ भी गलत या अस्वाभाविक नहीं है।

आगामी चुनावों से पहले दोनों गुटों में तलवारें खिंची, सुलह के रास्ते बंद

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गुलाबराव पाटिल का यह बयान शिंदे सेना के भीतर की आम भावना को प्रदर्शित करता है। गुलाबराव पाटिल ने साफ कर दिया है कि केवल एक मुलाकात के आधार पर यह कयास लगाना कि दोनों पार्टियां एक साथ आ जाएंगी, पूरी तरह निराधार है। जून 2026 में होने जा रहे विधान परिषद चुनाव और उसके बाद आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए दोनों गुटों के बीच की खाई और ज्यादा चौड़ी हो गई है। पाटिल के इस पलटवार के बाद अब उद्धव गुट और संजय राउत इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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