महाराष्ट्र के पूर्व DGP संजय पांडे को हाईकोर्ट से राहत, फडणवीस-शिंदे के खिलाफ दबाव का केस रद्द, जानें मामला
Former Maharashtra DGP Sanjay Pandey News: बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी संजय पांडे के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। उन पर सीएम और डिप्टी सीएम के खिलाफ दबाव बनाने का आरोप था।
- Written By: आकाश मसने
महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी संजय पांडे (फाइल फोटो, सोर्स: सोशल मीडिया)
Sanjay Pandey Gets Relief From Bombay High Court: महाराष्ट्र के पूर्व कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक और मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर संजय पांडे को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद पांडे के साथ-साथ अधिवक्ता शेखर जगताप को भी राहत मिली है, जिनका नाम भी इस मामले में शामिल था।
क्या था संजय पांडे पर आरोप?
संजय पांडे पर आरोप था कि उन्होंने एक कारोबारी पर दबाव बनाकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की थी। कारोबारी ने दावा किया था कि पांडे ने उसके खिलाफ पुराने मामलों को दोबारा खोलने की धमकी दी और बयान देने के लिए दबाव बनाया।
यह मामला 2021 की कथित घटना से जुड़ा था, लेकिन कारोबारी की शिकायत के आधार पर एफआईआर 2024 में दर्ज की गई थी। इसी देरी को लेकर अदालत में सवाल उठाए गए। संजय पांडे की ओर से अदालत में कहा गया कि उनके खिलाफ मामला काफी देरी से दर्ज किया गया और शिकायत में देरी का कोई ठोस कारण भी नहीं बताया गया। उनके वकीलों ने दलील दी कि यह मामला केवल उन्हें निशाना बनाने और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से दर्ज किया गया था।
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पक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि इतने लंबे समय बाद दर्ज की गई एफआईआर की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले को रद्द करने का फैसला सुनाया।
झूठे मामलों में फंसाने और जबरन वसूली का आराेप
बिल्डर और व्यवसायी संजय पुनामिया का आरोप था कि साल 2021 में राज्य के कार्यवाहक डीजीपी रहते हुए संजय पांडे ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग किया और एक सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें प्रताड़ित किया।
शिकायत के अनुसार, संजय पांडे, वकील शेखर जगताप और अग्रवाल परिवार के सदस्यों ने मिलकर बिल्डर पुनामिया को झूठे बयान देने के लिए मजबूर किया और बात न मानने पर उन्हें पुराने मामलों को फिर से खोलने और नए झूठे मामले दर्ज कर जेल भेजने की धमकी दी थी।
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फडणवीस और शिंदे के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का दबाव
व्यवसायी पुनामिया ने दावा किया था कि जब वे अस्पताल में भर्ती थे, तब कुछ पुलिस अधिकारियों ने संजय पांडे के सीधे निर्देशों का हवाला देते हुए उन पर दबाव बनाया था। उनसे कहा गया था कि वे तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को एक कथित शहरी भूमि सीमा (ULC) घोटाले में झूठा फंसाएं। आरोप था कि इस राजनीतिक साजिश में सहयोग करने के बदले पुनामिया के खिलाफ चल रहे मामलों को बंद करने का प्रलोभन दिया गया था।
शेखर जगताप को भी राहत
इस मामले में अधिवक्ता शेखर जगताप का नाम भी सामने आया था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उन्हें भी बड़ी राहत मिली है। अदालत ने माना कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए मामला आगे चलाने का कोई ठोस आधार नहीं बनता।
