शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना का विरोध, विधानसभा में बोले फडणवीस

CM Devendra Fadnavis ने विधानसभा में कहा कि यदि इतिहास सही ढंग से पढ़ाया जाता तो कोई औरंगजेब को नायक नहीं मानता। उन्होंने शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना का भी विरोध किया।
Devendra Fadnavis
देवेंद्र फडणवीस (सौ. सोशल मीडिया )
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Shivaji Maharaj vs Tipu Sultan Debate: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर पिछले 70 साल के दौरान स्कूलों में इतिहास को सही ढंग से पढ़ाया जाता, तो कोई भी मुसलमान मुगल बादशाह औरंगजेब को "नायक" नहीं मानता। उन्होंने मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के बीच तुलना करने के प्रयासों की भी निंदा की।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही। फडणवीस ने कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पुस्तकों में पहले मुगलों पर 17 पृष्ठ और शिवाजी महाराज पर केवल एक पृष्ठ था।

मुगलों पर 17 पृष्ठ व शिवाजी महाराज पर महज एक पृष्ठ था

  • उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अब शिवाजी महाराज और मराठा इतिहास के लिए 20 पृष्ठ सुनिश्चित किये हैं। उन्होंने कहा, अगर पिछले 70 साल में इतिहास सही ढंग से पढ़ाया जाता, तो एक भी मुसलमान औरंगजेब को नायक नहीं मानता। हम आक्रांताओं को नायक मानने वालों का हमेशा विरोध करेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह टीपू सुल्तान के अच्छे या बुरे होने की बहस में नहीं पड़ रहे हैं।
  • उन्होंने कहा, "हालांकि, हम टीपू सुल्तान और छत्रपति शिवाजी महाराज की किसी भी तरह की तुलना का विरोध करेंगे। टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी, लेकिन उन्होंने ऐसा अपने राज्य को बचाने के लिए किया। लेकिन उन्होंने 75,000 हिंदुओं और 33,000 नायर को भी मार डाला। इससे पहले, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना करके विवाद खड़ा कर दिया था।
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