

महाराष्ट्र कैबिनेट ने किसानों और ST महामंडल के लिए बड़े फैसले लिए
बैठक में कृषि और सिंचाई समेत कुल बारह महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए
राज्य सरकार के इन ऐतिहासिक फैसलों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी
Maharashtra Cabinet Decisions: महाराष्ट्र मंत्रिमंडल की हालिया बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने और विभिन्न सामाजिक वर्गों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से कई ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगाई गई है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आयोजित इस कैबिनेट बैठक में कृषि, सिंचाई, ढांचागत विकास, उद्योग, विमानन और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े 12 प्रमुख फैसले लिए गए।
राज्य के 304 सूखाग्रस्त तालुकाओं के लगभग 1.5 करोड़ किसानों के लिए दिवाली का त्योहार बड़ी राहत लेकर आया है। मंत्रिमंडल ने फैसला किया है कि जिन किसानों की फसलों का 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है, उन्हें ₹5,000 की अग्रिम सहायता राशि दी जाएगी। यह धनराशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी।
ग्रामीण इलाकों में खेत-सड़कों के निर्माण को बढ़ावा देने वाली 'मातोश्री ग्रामसमृद्धी शेत-पाणंद रस्ते योजना' को 'विकसित भारत - जी राम जी योजना' तथा अन्य योजनाओं के समन्वय से जारी रखा जाएगा। इसे अब जिला स्तरीय योजना के रूप में मान्यता दी गई है, जिससे जिला नियोजन समिति (DPC) के कोष से कार्य कराए जा सकेंगे। इसके साथ ही, मैदानी स्तर की व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने के लिए राज्य स्तरीय समिति को विशेष अधिकार सौंपे गए हैं।
राज्य में दिव्यांगजनों के पुनर्वास, कल्याण और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक संवेदनशील फैसला लिया गया है। अब जिला वार्षिक योजना (सर्वसाधारण) के अंतर्गत कुल बजट का 1% फंड विशेष रूप से दिव्यांगजनों की योजनाओं और कल्याणकारी कार्यों पर खर्च करने को मंजूरी दे दी गई है।
कृषि उत्पादन बढ़ाने और जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए जल संसाधन विभाग के 39,722 पदों के संशोधित ढांचे को हरी झंडी मिली है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025 के अंत तक 58 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के दायरे में लाने का लक्ष्य तय किया है, जो 2016 के 45 लाख हेक्टेयर में 13 लाख हेक्टेयर की अतिरिक्त वृद्धि को दर्शाता है।
इस व्यवस्था के संचालन हेतु कुल 1,450 सिंचाई शाखा कार्यालयों (1,340 मौजूदा + 110 नए) के लिए पद सृजित किए जाएंगे और सिंचाई सहायक नामक नया संवर्ग गठित होगा। इसके अलावा 5 महामंडलों के लिए 15 कार्यकारी अभियंता स्तर के विशेषज्ञ पदों का भी सृजन किया गया है।
पुणे को वैश्विक व्यापार और सम्मेलनों का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए लोहगांव में नई दिल्ली के 'भारत मंडपम' की तर्ज पर एक राष्ट्रीय स्तर का भव्य एग्जीबिशन सेंटर बनाया जाएगा। इसके लिए पुणे मनपा की विकास योजना में लोहगांव स्थित खेल के मैदान के आरक्षण में आवश्यक संशोधन को मंजूरी दी गई है।
राज्य में पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक वाहन प्रोत्साहन नीति के तहत बजाज ऑटो लिमिटेड को ₹66.82 करोड़ (66 करोड़ 82 लाख रुपये) की वित्तीय प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है।
कोकण क्षेत्र में पर्यटन और हवाई कनेक्टिविटी को पुनर्जीवित करने के लिए सिंधुदुर्ग स्थित चिपी हवाई अड्डे की उड़ान सेवाओं को दोबारा शुरू किया जा रहा है। नवी मुंबई - चिपी (सिंधुदुर्ग) हवाई मार्ग पर विमान परिचालन सुचारू करने हेतु विमानन कंपनियों को 100% वायबिलिटी गैप फंडिंग उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
लातूर जिले के अहमदपूर तालुका स्थित शिरूर ताजबंद में संचालित 'मल्हारराव होळकर भटक्या विमुक्त जमाती सहकारी सूतगिरणी' को सुचारू रूप से चलाने और वस्त्रोद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान करने का फैसला लिया गया है।
राज्य में बड़े बुनियादी ढांचागत प्रोजेक्ट्स को गति देने के लिए महाराष्ट्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी नीति में संशोधन किया गया है। इस सुधार से परियोजनाओं की प्रारंभिक जांच, सैद्धांतिक मंजूरी, प्रस्ताव, निविदा प्रक्रिया और बोली प्रणाली अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और तेज बनेगी।
जिला परिषदों के प्रशासनिक तंत्र को सुव्यवस्थित करने के लिए कनिष्ठ प्रशासन अधिकारी (S-13) और सहायक प्रशासन अधिकारी (S-14) के दो अलग संवर्गों को मिलाकर अब 'सहायक प्रशासन अधिकारी' (S-14) का एक ही एकीकृत संवर्ग बना दिया गया है।
औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए धुले जिले के रावेर स्थित 289 हेक्टेयर 69 आर जमीन महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (MIDC) के प्रादेशिक अधिकारी को औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार हेतु उपलब्ध कराने की मंजूरी दी गई है।
उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालय प्रशासन में सुधार के तहत डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर तंत्रशास्त्र विश्वविद्यालय अधिनियम, 2014 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इसके तहत विश्वविद्यालय के प्र-कुलपति को पद से हटाने का विवेकाधिकार अब कुलाधिपति को प्रदान किया गया है।