महाराष्ट्र एटीएस की हिरासत में अयान शेख ने खोला पाकिस्तान से संचालित टेलीग्राम ग्रुप्स का राज

Ayan Yusuf Sheikh ATS Investigation: जैश और ISIS कनेक्शन में गिरफ्तार अयान शेख ने ATS को बताया कि टेलीग्राम पर पाकिस्तानी हैंडलर्स ने नफरती कंटेंट के जरिए उसका ब्रेनवाश किया था।
Ayan Yusuf Sheikh ATS Investigation
Ayan Yusuf Sheikh ATS Investigation (फोटो क्रेडिट-X)
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Jaish-e-Mohammed ISIS Recruitment Maharashtra: महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) की गिरफ्त में आए 21 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र अयान यूसुफ शेख ने पूछताछ के दौरान कट्टरपंथ के उस डिजिटल जाल का खुलासा किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग का छात्र अयान, पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और आईएसआईएस (ISIS) से कथित संबंधों के आरोप में 9 मार्च तक एटीएस की हिरासत में है। जांच में सामने आया है कि अयान को एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप 'टेलीग्राम' के जरिए नफरत फैलाने वाले कंटेंट और वैचारिक हेरफेर का शिकार बनाकर गुमराह किया गया था।

एटीएस के अनुसार, अयान पिछले 6-7 महीनों से ऐसे अंतरराष्ट्रीय टेलीग्राम चैनलों में सक्रिय था, जिनमें पाकिस्तान समेत कई देशों के सदस्य शामिल थे। इन ग्रुप्स में पाकिस्तानी सदस्य फर्जी पहचान बनाकर सक्रिय थे, जिनका सीधा संबंध जैश-ए-मोहम्मद से पाया गया है। यह समूह वैश्विक स्तर पर मुस्लिम समुदायों को लक्षित करते हुए दुष्प्रचार फैलाता था। अयान के पास से कश्मीर में राजनीतिक संघर्ष के वीडियो, आतंकवादियों के ऑडियो संदेश और विभिन्न देशों में समुदायों के कथित उत्पीड़न से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है।

नफरत फैलाने वाला 'ब्रेनवाश' मॉडल

महाराष्ट्र एटीएस ने अयान के मामले को 'घृणा अपराध के माध्यम से मस्तिष्क-प्रचार' (Radicalization through Hate Crimes) का एक क्लासिक मॉडल बताया है। जांच अधिकारियों के अनुसार, इस पैटर्न में धार्मिक पहचान का भावनात्मक हेरफेर किया जाता है ताकि ऑनलाइन जुड़ाव को ऑफलाइन हिंसक कार्रवाई में बदला जा सके। ग्रुप में साझा किए गए कंटेंट में सदस्यों को उकसाने के लिए सजा, प्रतिशोध और अपने समुदाय की "रक्षा" के नाम पर हिंसा करने पर बहस की जाती थी। अयान इन आक्रामक पोस्टों पर अक्सर प्रतिक्रिया देता था और जैश-ए-मोहम्मद को दुनिया भर के मुसलमानों का रक्षक मानने लगा था।

एन्क्रिप्टेड चैनलों का खतरनाक नेटवर्क

पूछताछ में अयान ने स्वीकार किया कि वह धीरे-धीरे ऐसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ग्रुप और चैनलों का हिस्सा बनता गया जहां हिंसा को वैचारिक आधार पर सही ठहराने का प्रयास किया जाता था। उसने बताया कि कट्टरपंथी सामग्री अक्सर छोटे और आसानी से समझ आने वाले टुकड़ों में भेजी जाती थी, ताकि युवाओं का ध्यान खींचा जा सके। अयान ने न केवल इस कंटेंट को खुद देखा, बल्कि वह इसे अपने करीबी दोस्तों के साथ ग्रुप चैट में साझा भी करने लगा था। यह खुलासा सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे एक पढ़ा-लिखा युवा डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए स्लीपर सेल या 'लोन वुल्फ' के रूप में तैयार किया जा सकता है।

पाकिस्तान से संचालित हो रहा था मॉड्यूल

अयान शेख के टेलीग्राम चैनलों की जांच में पाया गया कि कई सदस्यों ने फर्जी नामों का उपयोग किया था, जो वास्तव में पाकिस्तान स्थित संगठनों के हैंडलर थे। ये हैंडलर भारत, म्यांमार, यूरोपीय देशों और अमेरिका में मुस्लिम समुदायों के कथित उत्पीड़न को उजागर करने वाली सामग्री का उपयोग वैचारिक जहर घोलने के लिए कर रहे थे। एटीएस अब उन अन्य संपर्कों की पहचान करने में जुटी है जिनसे अयान लगातार संपर्क में था और क्या उसने किसी विशेष हमले या साजिश की तैयारी शुरू कर दी थी। फिलहाल, एटीएस ने युवाओं को ऑनलाइन सुरक्षित रहने और संदिग्ध सोशल मीडिया गतिविधियों की रिपोर्ट करने की सलाह दी है।

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