Jyoti Waghmare Rohit Tilak Eknath Shinde (डिजाइन फोटो)
Eknath Shinde Rajya Sabha Candidates: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी ‘चाणक्य’ नीति से सबको चौंका दिया है। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन के आखिरी दिन शिवसेना ने एक नहीं, बल्कि दो उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। शिंदे गुट की ओर से सोलापुर की तेजतर्रार नेता ज्योति वाघमारे और लोकमान्य तिलक के परपोते रोहित तिलक को मैदान में उतारा गया है। यह कदम सीधे तौर पर महाविकास आघाड़ी (MVA) के उम्मीदवार शरद पवार के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
संख्या बल के आधार पर महायुति के पास छह सीटें सुरक्षित थीं, लेकिन शिंदे द्वारा सातवें उम्मीदवार के रूप में रोहित तिलक का नाम आगे बढ़ाना इस चुनाव को ‘निर्विरोध’ से बदलकर ‘कांटे की टक्कर’ में ले आया है।
एकनाथ शिंदे ने सोलापुर की रहने वाली और पार्टी की मुखर प्रवक्ता ज्योति वाघमारे पर भरोसा जताकर एक बड़ा सामाजिक संदेश दिया है। दलित समाज से आने वाली ज्योति वाघमारे पिछले काफी समय से सोशल मीडिया और टीवी डिबेट्स में विपक्षी नेताओं, विशेषकर सुषमा अंधारे को कड़ी टक्कर देने के लिए जानी जाती हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजकर न केवल उनके समर्पण को पुरस्कृत किया है, बल्कि आगामी निकाय चुनाव और विधानसभा समीकरणों को देखते हुए दलित और महिला मतदाताओं को भी साधने की कोशिश की है।
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दूसरे उम्मीदवार के रूप में रोहित तिलक का चयन इस चुनाव का सबसे बड़ा ‘सरप्राइज’ माना जा रहा है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के परपोते रोहित तिलक लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे हैं। उन्हें मैदान में उतारकर एकनाथ शिंदे ने पुणे के ब्राह्मण समाज और विरासत की राजनीति को अपने पाले में करने का प्रयास किया है। रोहित तिलक की उम्मीदवारी सीधे तौर पर शरद पवार के लिए परेशानी का सबब बन सकती है, क्योंकि उन्हें जिताने के लिए शिंदे को केवल 9 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी, जिसकी व्यवस्था वे निर्दलीय और असंतुष्ट विधायकों के जरिए कर सकते हैं।
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 37 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है। महायुति के पास वर्तमान में अपने कोटे से अतिरिक्त वोट मौजूद हैं। शिवसेना के इस ‘डबल अटैक’ के बाद अब शरद पवार की सीट पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि शिंदे का यह कदम केवल जीत के लिए नहीं, बल्कि महाविकास आघाड़ी के भीतर सेंधमारी (Cross Voting) की संभावनाओं को टटोलने के लिए उठाया गया है। यदि गुप्त मतदान में विपक्षी विधायक टूटते हैं, तो यह शरद पवार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका होगा।