महाराष्ट्र में नया सियासी भूचाल: शिवसेना में होगा बच्चू कडू की 'प्रहार' का विलय? शिंदे ने चला बड़ा दांव

Bachchu Kadu Shiv Sena Merger: बच्चू कडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी का शिवसेना में विलय संभव। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दिया MLC पद का ऑफर।
Bachchu Kadu Prahar Janshakti Party Merger Shivsena
Bachchu Kadu Prahar Janshakti Party Merger Shivsena (फोटो क्रेडिट-X)
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Bachchu Kadu Prahar Janshakti Party Merger: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की दहलीज पर राज्य की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। कद्दावर और आक्रामक नेता बच्चू कडू के नेतृत्व वाली प्रहार जनशक्ति पार्टी का मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय होने की चर्चाएं जोरों पर हैं। राजनीतिक गलियारों में खबर है कि एकनाथ शिंदे ने विदर्भ के इस फायरब्रांड नेता को अपने पाले में लाने के लिए मास्टरप्लान तैयार किया है, जिससे आगामी चुनावों में महायुति और विशेषकर शिवसेना की ताकत बढ़ सके।

दरअसल, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बच्चू कडू को विधान परिषद (MLC) भेजने के पक्ष में हैं। हालांकि, शिवसेना के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं ने कडू की उम्मीदवारी का विरोध किया था। इस आंतरिक विरोध को शांत करने के लिए शिवसेना के रणनीतिकारों ने एक शर्त रखी है—यदि बच्चू कडू अपनी पार्टी 'प्रहार' का शिवसेना में पूर्ण विलय करते हैं, तभी उन्हें पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार बनाया जाएगा।

कार्यकर्ताओं के पाले में गेंद

बच्चू कडू ने इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय अपने जमीनी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की राय मांगी है। उन्होंने मोबाइल एसएमएस (SMS) के माध्यम से राज्य भर के प्रमुख पदाधिकारियों से पूछा है कि क्या उन्हें शिवसेना में विलय कर लेना चाहिए? दिलचस्प बात यह है कि अधिकांश कार्यकर्ताओं ने जवाब में कहा है कि "बच्चू कडू जो भी फैसला लेंगे, हमें मंजूर होगा।" कार्यकर्ताओं द्वारा निर्णय लेने का अधिकार नेता को सौंपे जाने के बाद अब विलय की संभावनाएं और प्रबल हो गई हैं।

शिंदे की दूरगामी रणनीति

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि एकनाथ शिंदे यह समझ चुके हैं कि भविष्य की राजनीति में केवल भाजपा के भरोसे रहना जोखिम भरा हो सकता है। विदर्भ जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए उन्हें बच्चू कडू जैसे आक्रामक चेहरे की जरूरत है, जो सीधे तौर पर भाजपा या विपक्ष को चुनौती दे सकें। बच्चू कडू का साथ मिलना शिंदे के लिए विदर्भ में संजीवनी की तरह काम कर सकता है।

फिलहाल, सबकी नजरें बच्चू कडू के अंतिम आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं। यदि यह विलय होता है, तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) के बाद यह राज्य का दूसरा बड़ा राजनीतिक विलय होगा, जो चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख देगा।

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