पॉलिटिक्स में कभी पूर्णविराम नहीं… एकनाथ शिंदे ने कुछ इस अंदाज़ में दी उद्धव ठाकरे को विदाई
Eknath Shinde: महाराष्ट्र विधान परिषद में कार्यकाल समाप्त होने पर उद्धव ठाकरे सहित 9 सदस्यों को विदाई देते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राजनीति में कभी पूर्णविराम नहीं होता।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आंचल लोखंडे
Eknath Shinde statement (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra Legislative Council: राज्य महाराष्ट्र विधान परिषद के 9 सदस्यों का कार्यकाल मंगलवार को समाप्त होने के साथ ही उन्हें विधान परिषद के सदस्यों के साथ विदा कर दिया गया। इस दल में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और शिव सेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे भी शामिल थे। उनका नाम सम्मान लेते हुए एकनाथ शिंदे ने उन्हें वोट दिया। लार्ड्स में यूसुफ़ ठाकरे को विदाई समारोह का शिंदे का गौरव चर्चा का विषय बन गया।
फिर से घर में आने की चाहत
करीब चार साल पहले युसुथ ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार से अलग एहमियत नई सरकार बनाने वाले फिर से बीजेपी नेता एकनाथ शिंदे ने सबसे पहले युथ ठाकरे को बधाई दी और उनके सदन में आने की कामना की। इस मौके पर उन्होंने बड़ा संदेश देते हुए कहा, “नीति में कोई पूर्णविराम नहीं होता।”
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शिंदे ने कहा कि विधान परिषद में सत्ता पक्ष और नामांकन के बीच गहरी समानता और बहस बनी हुई है, लेकिन आज का क्षण भावुक होने वाला है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के एक बयान में कहा कि यदि कोई भी सदस्य अपना पद छोड़ देता है तो उसका सार्वजनिक जीवन समाप्त नहीं होता है। राजनीति में कोई भी पूरी तरह से ख़त्म नहीं होता और ये सभी सदस्य भविष्य में भी सक्रिय रहेंगे। उन्हें भरोसा था कि भविष्य में उनके कई सदस्य फिर से सदन में लौटेंगे।
ट्रैक्टर के अधिकारी
कई वर्षों बाद शिंदे ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लिए उनके उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना की। उन्होंने कहा कि वे अपने भविष्य की राजनीतिक यात्रा के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं। इस दौरान उन्होंने उपसभापति नीलम गोर्हे के 24 वर्षों के लगातार सार्वजनिक जीवन का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने उपसभापति के रूप में प्रभावशाली ढंग से काम करते हुए, नैतिकता और न्याय की भूमिका निभाई।
शिंदे ने अमोल मिटकरी की प्रभावशाली वक्तृत्व शैली का अभिनय करते हुए उन्हें विदर्भ का एक तेजतर्रार नेता बताया, जो संत साहित्य का भी अध्ययन करते हैं।
सातारा के मिट्टी से जुड़े नेता शशिकांत शिंदे
शशिकांत शिंदे के बारे में उन्होंने कहा कि वे सातारा के मिट्टी से जुड़े नेता हैं और मजदूर वर्ग में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। रंजीतसिंह मोहिते-पाटिल के सहकार क्षेत्र में योगदान की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने ग्रामीण उद्योग और किसानों की अर्थव्यवस्था पर प्रभावशाली काम किया है।
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इसी तरह राजेश राठौड़, संदीप जोशी, दादाराव केचे और संजय केनेकर ने भी अपने अभिनय के बारे में बताया। अपने हवाई अध्ययन के अंत में शिंदे ने कहा, “साथ में ही ख़त्म हो जाए, रिश्ता नहीं टूटता। विदाई ख़त्म नहीं, बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत होती है।” उन्होंने सभी सहयोगियों को कविता के समर्थकों के माध्यम से भी शुभकामनाएं दीं।
