‘इन्विजनिंग इंडिया’ के दूसरे संस्करण का विमोचन, संजय देशमुख की पुस्तक में 2047 के विकसित भारत का रोडमैप
Mumbai University News: मुंबई के नेहरू सेंटर में डॉ संजय देशमुख की पुस्तक इन्विजनिंग इंडिया का विमोचन हुआ, जिसमें 2047 तक विकसित भारत के विजन पर जोर दिया गया।
- Reported By: रूपम सिंह
डॉ. संजय देशमुख (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Envisioning India Dr Sanjay Deshmukh: मुंबई यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर डॉ संजय देशमुख द्वारा लिखित ‘इन्विजनिंग इंडिया’ के सेकेंड एडिशन का विमोचन वर्ली के नेहरू सेंटर में किया गया। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का खाका खींचने वाली इस पुस्तक के विमोचन समारोह में देश के कई दिग्गज जुटे। पद्मविभूषण प्रोफेसर एम एम शर्मा, गोदरेज आर्काइव्ज काउंसिल की चेयरपर्सन डॉ फिरोजा गोदरेज, पद्मश्री कुमार केतकर,रिलायंस इनोवेशन लीडरशिप सेंटर के हेड सुशील बोर्डे,पाशा पटेल सहित कई गणमान्य की उपस्थिति में पुस्तक का विमोचन किया गया।
अपने विशेष शोध के जरिए भारत के फार्मा, पेट्रोकेमिकल एवं फर्टिलाइजर इंडस्ट्री को नई दिशा देने वाले पद्मविभूषण प्रोफेसर एम एम शर्मा ने कहा कि देश को फंडामेंटल रिसर्च की जरूरत है। डॉ. देशमुख की यह पुस्तक फंडामेंटल रिसर्च में उपयोगी साबित होगी। डॉ शर्मा ने कहा कि देश के ग्रामीण भागों में प्राइमरी एजुकेशन पर ध्यान देने की ज्यादा जरूरत है। उन्होंने महिला शक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि आज महाराष्ट्र से ज्यादा महिला वैज्ञानिक निकल रही हैं।
डॉ शर्मा ने कहा कि देश की इतनी बड़ी आबादी के लिए ज्यादा अन्न की जरूरत है। देश में एग्रीकल्चर का विकास टेक्नोलॉजी से ही होगा। उन्होंने कहा कि रमन इफेक्ट आज भी काम कर रहा है। इंडिया में केपीबिलिटी है। असफलता से ही सफलता मिलेगी इसलिए रिसर्च जारी रखिए। डॉ.एनएम शर्मा ने कहा कि यूनिवर्सिटी परीक्षा के लिए नहीं है बल्कि फंडामेंटल रिसर्च के लिए हैं। सायन्स भी कल्चर ही है और हमें इन्वेंटर की जरूरत है।
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डॉ. फिरोजा गोदरेज ने कहा कि डॉ संजय देशमुख अपने विचारों एवं लेखन से राष्ट्र को शेप दे रहे हैं। पर्यावरण सरंक्षण के साथ विकास पर ध्यान है। इनका मैंग्रोव सरंक्षण पर बेमिसाल अध्ययन रहा है। डॉ फिरोजा ने कहा कि भारत की विविधता और भाषा इसकी ताकत है। क्लाइमेट चेंज बडी समस्या बन रहा है। विकसित भारत 2047 बड़ी जिम्मेदारी लेकर आएगा। विकसित भारत 2047 को यह पुस्तक समर्पित है।
पीढ़ियों ,सरकारों एवं संस्थाओं के बीच संवाद बढ़ाना होगा। यह पुस्तक समाज,संस्था व भारत सरकार के लिए काफी उपयोगी साबित होने वाली है। पद्मश्री कुमार केतकर ने कहा कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ संजय देशमुख की इस पुस्तक को देश के नेताओं से लेकर नीतिनिर्धारकों को पढ़नी चाहिए। इंडिया के ब्यूरोक्रेसी से लेकर पीएमओ को यह पुस्तक जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की यूनिवर्सिटी को शोध के लिए ज्यादा निधि की आवश्यकता है।
डिजिटल लॉन्चिंग सुशील बोर्डे ने की
रिलायंस इनोवेशन लीडरशिप सेंटर के हेड सुशील बोर्डे ने पुस्तक के डिजिटल वर्जन का विमोचन करते हुए कहा कि यह पुस्तक बिल्डिंग इंडिया का विजन है। उन्होंने इसे भविष्य की डाक्यूमेंट्री बताते हुए कहा कि मुंबई यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के वाइस चांसलर डॉ. संजय देशमुख भूगोल वनस्पति विज्ञान, लाइफ साइंसेज पर्यावरण विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी के ज्ञाता हैं।
यह पुस्तक राष्ट्रनिर्माण में सहयोग देगी। चैतन्य जोशी ने भी पुस्तक को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। पद्मविभूषण प्रोफेसर रघुनाथ माशेलकर एवं मुंबई मनपा की आयुक्त डॉ अश्विनी भिड़े ने डिजिटल संदेश के माध्यम से डॉ संजय देशमुख की पुस्तक को शुभकामनाएं दी।
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डॉ देशमुख ने किया अतिथियों का स्वागत
डॉ संजय देशमुख ने कहा कि प्रोफेसर एमएम शर्मा देश की तीन पीढ़ियों के आदर्श हैं। फिरोजा गोदरेज का मुम्बई के इकोसिस्टम में बहुत बड़ा योगदान रहा है। सुशील बोर्डे इनोवेशन के मास्टर हैं। इसके साथ कुमार केतकर का भी मेरे जीवन मे बड़ा योगदान रहा है। लाइफ के हर मोड़ पर अच्छे लोग मिले।
देश में एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी बढ़ाने की जरूरत है। हमें देश के निर्माण में कृषि क्षेत्र के योगदान को बढ़ाना होगा। सोसायटी के सभी वर्ग का योगदान जरूरी है। अलग विचारधारा के होकर भी देश हित मे एक हैं। कार्यक्रम का संचालन प्रिंस ग्रोवर जबकि धन्यवाद प्रस्ताव
शिवानी धुरी ने किया।
