Devendra Fadnavis statement (सोर्सः सोशल मीडिया)
Devendra Fadnavis on Ajit Pawar Case: पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मृत्यु के संदर्भ में रोहित द्वारा कछुआ गति से चल रही जांच और महाराष्ट्र में एफआईआर न होने पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भावुक और आक्रामक नजर आए।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच-सात वर्षों में अजित दादा के साथ मेरी जितनी गहरी मित्रता थी, शायद ही किसी और की रही हो। यदि यह महज दुर्घटना नहीं बल्कि साजिश है, तो हम आकाश-पाताल एक कर देंगे।
दोषी चाहे किसी का भी ‘बाप’ क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा, उसे मुर्दा भी खोदकर निकालेंगे। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद पहले एडीआर दर्ज होती है, जिसे बाद में जांच के आधार पर एफआईआर में बदला जाता है।
Detailed statement on the aircraft accident involving former DCM late Ajitdada Pawar. माजी उपमुख्यमंत्री स्व. अजितदादा पवार यांच्या विमान अपघात प्रकरणी विस्तृत निवेदन (विधानसभा, मुंबई | दि. 25 मार्च 2026)#Maharashtra #Mumbai pic.twitter.com/uyTBpG6KZd — Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) March 25, 2026
सदन में भोंदू बाबा अशोक खरात के मामले पर भी चर्चा हुई। फडणवीस ने चुटकी चुटकी लेते लेते हुए हुए अंधविश्वास पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यदि जादू-टोना और नींबू-मिर्ची से समस्याएं हल हो जातीं तो अशोक खरात जैसे भोंदू बाबा आज डोनाल्ड ट्रंप के सुरक्षा सलाहकार होते।
फिर हमें सीमा पर सैनिक भेजने की जरूरत नहीं पड़ती, पाच-दस भोंदू बाबा ही सीमा सुरक्षित कर देते। उन्होंने स्पष्ट किया कि खरात मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी और अंधविश्वास फैलाने वालों के लिए कानून के नियम अंतिम चरण में हैं।
सातारा जिला परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान हुई कथित धक्का-मुक्की के मामले में विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोर्डे ने सातारा के पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी के निलंबन के निर्देश दिए थे, इस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में बिना नाम लिए तीखा प्रहार किया।
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उन्होंने कहा कि अब उल्टा ही होने लगा है। हमारे अधिकारों में सभापति अतिक्रमण कर रही हैं।” फडणवीस ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी का निलंबन पूरी तरह प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का मामला है, जिसमें सभापति पद का हस्तक्षेप उचित नहीं है। उपसभापति के इस कदम पर भाजपा ने भी सवाल उठाए थे।