मुंबई में बिनौला रिफाइंड तेल के भाव गिरे, कमजोर मांग और नई कपास की आवक बनी वजह; जानिए क्या है बाजार का रुख...

Cottonseed Oil Price In Mumbai: नई कपास की आवक और कमजोर मांग से बिनौला तेल के भाव एक महीने में ₹1,500 घटकर ₹14,450 प्रति क्विंटल हुए। हालांकि, महंगे आयात से आगे बड़ी गिरावट सीमित रह सकती है।
Cottonseed Oil Price Falls New Cotton Arrivals Weak Demand
बिनौला रिफाइंड तेल के भाव गिरे(सोर्स: AI)
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New Cotton Arrivals Weak Demand: देश में बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों का आयात करना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धजन्य परिस्थितियों में खाद्य तेल की कीमतें भी बढ़ रहीं हैं। ऐसे में देश में उत्पादित तेल की उपलब्धता से आयात पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है।

बिनौला तेल की कीमतों में गिरावट

कपास की फली से बनने वाले बिनौला तेल की कीमतों में बीते एक माह के दौरान उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर भारत में नई कपास का सीजन शुरू होने और रिफाइंड तेल व वनस्पति घी निर्माताओं की मांग कमजोर रहने से बिनौला तेल के भाव करीब 1500 रुपए प्रति क्विंटल घटकर 14,450 रुपए प्रति क्विंटल रह गए हैं।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और विदेशी तेलों की संभावित महंगाई को देखते हुए अब इसमें बड़ी गिरावट की संभावना कम मानी जा रही है।

प्रमुख मंडियों में घटे भाव

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेशभाई ठक्कर ने बताया कि ताजा बाजार सर्वेक्षण के अनुसार मांग कमजोर रहने से बिनौला तेल में मंदी का रुख बना हुआ है।

मुंबई में भी उठाव कमजोर होने के कारण बिनौला रिफाइंड तेल के भाव इसी अनुपात में घटकर 15,300 रुपए प्रति क्विंटल रह गए हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब और हरियाणा की मंडियों में नई कपास की आवक करीब 11,000 गांठ प्रतिदिन के स्तर पर पहुंच रही है।

सीजन आगे बढ़ने के साथ उत्तर भारत की मंडियों में कपास की आवक बढ़ने की संभावना है। इससे कपास के बीज की उपलब्धता बढ़ सकती है और निकट भविष्य में बिनौला की कीमतों पर कुछ और दबाव देखने को मिल सकता है। पंजाब की मंडियों में बिनौला के भाव भी 500 रुपए घटकर 4,600 से 4,700 रुपए प्रति क्विंटल रह गए हैं।

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कपास के बीज से तैयार होता है बिनौला रिफाइंड तेल

बिनौला तेल देश में उत्पादित होने वाला महत्वपूर्ण खाद्य तेल है, जो कपास के बीज से तैयार किया जाता है। घरेलू स्तर पर इसका उत्पादन बढ़ने और उपभोक्ताओं के बीच इसका उपयोग बढ़ने से खाद्य तेलों की जरूरत का एक हिस्सा देश में ही पूरा किया जा सकता है।

इससे आयातित खाद्य तेलों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है और विदेशी मुद्रा की बचत की संभावना भी बढ़ती है। ठक्कर के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में गतिरोध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से विदेशी तेलों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

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दूसरी ओर, सरकार ने खाद्य तेलों पर महंगाई का दबाव कम करने के लिए मूल आयात शुल्क में पांच प्रतिशत की कटौती की है। इसके बावजूद डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 96.35 के स्तर पर कारोबार करने से आयात महंगा पड़ने की आशंका है।

कुल मिलाकर, नई कपास की बढ़ती आवक और कमजोर ग्राहकी से बिनौला तेल में सीमित मंदी का दबाव बना रह सकता है, लेकिन विदेशी तेलों की कीमतों और महंगे आयात के चलते इसमें आगे बड़ी गिरावट की संभावना कम दिखाई दे रही है।

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