

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ठाकरे बंधुओं के साथ मंच साझा करने पर आश्चर्य जताया।
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने व्यंग्यचित्रकला के अपने पुराने संस्मरण साझा किए।
मुंबई में मराठी व्यंग्यचित्रकारों के लिए एक विश्वस्तरीय आर्ट गैलरी बनाई जाएगी।
Devendra Fadnavis Thackeray Brothers Together Book Launch Mumbai: महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में उस समय एक बेहद ही दुर्लभ और यादगार नज़ारा देखने को मिला, जब राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक ही मंच पर एक साथ मुस्कुराते हुए नज़र आए। मौका था वरिष्ठ व्यंग्यचित्रकार प्रशांत कुलकर्णी द्वारा संपादित और ग्रंथाली द्वारा प्रकाशित पुस्तक के विमोचन समारोह का। इस पुस्तक में 1881 से लेकर मराठी व्यंग्यचित्रकारों के 100 वर्षों से अधिक के ऐतिहासिक सफर का संकलन किया गया है।
राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को किनारे रखकर आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में तीनों ही प्रमुख नेताओं के भाषणों में ज़बरदस्त हसी-ठिठोली, एक-दूसरे पर चुटीले तंज और आत्मीयता देखने को मिली।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने भाषण की शुरुआत में ही लोगों की उत्सुकता पर चुटकी ली। फडणवीस ने कहा, मुझे नहीं पता कि लोगों को हमारे एक साथ मंच पर आने से क्यों आश्चर्य हुआ। हमें न तो इस कार्यक्रम का निमंत्रण मिलने पर आश्चर्य हुआ और न ही एक साथ मंच साझा करने पर। कला और साहित्य का सम्मान करना और राजनीतिक वैर को भूलकर एक साथ आना महाराष्ट्र की महान संस्कृति और परंपरा रही है।
फडणवीस ने देश के अन्य राज्यों से तुलना करते हुए कहा कि दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में अलग-अलग दलों के नेता एक-दूसरे के प्रति बहुत कड़वाहट रखते हैं, लेकिन महाराष्ट्र का सौभाग्य है कि यहां वैचारिक मतभेदों के बावजूद नेता एक मंच पर बैठ सकते हैं, एक साथ हंस सकते हैं और चाय पी सकते हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति का श्रेय राज ठाकरे को देते हुए उनका विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। फडणवीस ने खुलासा किया कि इस ऐतिहासिक पुस्तक का विमोचन मुख्यमंत्री के हाथों होना चाहिए, यह सुझाव खुद राज ठाकरे ने दिया था और उन्होंने ही फोन करके मुझे इस कार्यक्रम में आने के लिए कहा था।
फडणवीस ने हंसते हुए कहा कि सबसे अंत में भाषण देने का फायदा यह है कि राज ठाकरे अब उनके बयान पर कोई तुरंत पलटवार नहीं कर पाएंगे। उन्होंने राज ठाकरे के साथ अपनी एक पुरानी मुलाकात का किस्सा याद करते हुए कहा कि उन्होंने एक बार राज ठाकरे से गुज़ारिश की थी कि जब भी वे उनका व्यंग्यचित्र बनाएं, तो नाक या कान भले ही बड़ा बना दें, लेकिन पेट बड़ा न बनाएं।
साथ ही उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे दोनों ही बेहतरीन व्यंग्यचित्रकार और छायाचित्रकार हैं, इसलिए अब उन्हें राजनीति का काम मुझे करने देना चाहिए।
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भाजपा नेता आशिष शेलार के बयान पर चुटकी लेते हुए कहा कि अगर शेलार मुख्यमंत्री को बुलाते रहते हैं, तो उन्हें 2029 तक मुख्यमंत्री ही बनाए रखें। राज ठाकरे ने बचपन में 1979-80 के दौरान मार्मिक पत्रिका में अपना पहला व्यंग्यचित्र छपने की यादें साझा कीं और बताया कि पारिवारिक कलात्मकता में उद्धव ठाकरे के हाथ में ऑयल पेंटिंग की बेहतरीन प्रतिभा थी, जबकि उन्होंने खुद व्यंग्यचित्रकला को चुना।
उद्धव ठाकरे ने अपने पिता और शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के प्रसिद्ध व्यंग्यचित्रों को याद किया। उन्होंने कहा कि एक सच्चा व्यंग्यचित्रकार किसी का शारीरिक मजाक नहीं उड़ाता, बल्कि स्वभाव और परिस्थितियों की गहराई को दिखाता है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि व्यंग्यचित्र इंसान को खुद पर हंसना सिखाता है। उन्होंने मंच पर अपनी पारिवारिक डोर का जिक्र करते हुए कहा, हम ठाकरे के तौर पर तो एक साथ हैं ही।
कार्यक्रम के दौरान मराठी व्यंग्यचित्रकारों की कला को सहेजने के लिए मुंबई में एक विशेष आर्ट गैलरी बनाने की मांग उठी। इस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि वे आशिष शेलार के साथ पहल करेंगे और इसमें राज ठाकरे व उद्धव ठाकरे दोनों की मदद लेकर मुंबई में व्यंग्यचित्रकारों के लिए एक विश्वस्तरीय गैलरी का निर्माण करेंगे।