

Chinchpoklicha Chintamani First Look: मुंबई के सुप्रसिद्ध सार्वजनिक गणेशोत्सव के इतिहास में एक बेहद सम्मानित और ऐतिहासिक स्थान रखने वाले लालबाग-परल इलाके के चिंचपोकली के चिंतामणी का पहला भव्य रूप आखिरकार देश के सामने आ गया है।
शनिवार को जैसे ही बप्पा के चेहरे से पर्दा हटाया गया, वहां उपस्थित सभी श्रद्धालु बप्पा का अत्यंत सुंदर और अलौकिक चेहरा देखकर पूरी तरह मंत्रमुग्ध और अवाक रह गए। गणेशोत्सव शुरू होने में अभी लगभग दो हफ्तों का समय बाकी है, ऐसे में बप्पा की यह पहली दिव्य झलक पाकर भक्तों का उत्साह चरम पर पहुंच गया है।
चिंतामणी बप्पा के इस फर्स्ट लुक का आयोजन भारी सुरक्षा व्यवस्था और शानदार तरीके से किया गया। जैसे ही बप्पा के चेहरे से पर्दा हटा, पूरा परिसर रंग-बिरंगी कंफेट्टी की बौछार और रंगीन धुएं के गुबार से सराबोर हो गया।
मुंबई पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को बप्पा के सुगम दर्शन हो सकें। आज शनिवार को ढोल-ताशों की गूंज, पारंपरिक थाट-बाट और चिंचपोकली के चिंतामणी का विजय हो के जोशीले जयघोष के साथ बप्पा का मुख्य आगमन कार्यक्रम धूमधाम से संपन्न होने जा रहा है।
चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल ने इस बार अपने 107वें वर्ष के अवसर पर भक्तों के लिए कुछ बेहद अद्भुत और कलात्मक तैयार किया है। इस वर्ष बप्पा की भव्य मूर्ति को तिरुपति बालाजी मंदिर की शैली के अनुसार सजाया जा रहा है।
इसके साथ ही, उत्सव के मुख्य पंडाल को हैदराबाद के स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर बेहद कलात्मक तरीके से सजाया जाएगा, जिससे पूरा लालबाग-परल परिसर तिरुपति-मय नजर आएगा।
बप्पा की सुंदर मूर्ति के शृंगार में भक्तों को गरुड़, कीर्तिमुख, शंख, चक्र और तिरुपति शैली के प्रसिद्ध नामम् जैसी दिव्य विशेषताएं देखने को मिलेंगी। इतना ही नहीं, मुख्य मंडप परिसर में तिरुपति बालाजी मंदिर, हैदराबाद के श्री वेंकटेश्वर मंदिर और भुवनगिरी मंदिर की पारंपरिक स्थापत्य कला की भव्य प्रतिकृतियां खड़ी की जा रही हैं।
दक्षिण भारतीय मंदिरों की पहचान कहे जाने वाले विशाल गोपुरम, दीपस्तंभ और पौराणिक रक्षक जीव याली की कलात्मक रचनाएं भी इस पूरे उत्सव स्थल की भव्यता में चार चांद लगाएंगी।
मुंबई शहर के ऐतिहासिक गिरणगांव में साल 1920 में स्थापित हुआ यह मंडल मुंबई की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक मजबूत आधार स्तंभ है। गिरणगांव के मेहनती समाज की संस्कृति, अटूट आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक माने जाने वाले चिंतामणी गणपति के आगमन कार्यक्रम को देखने के लिए हर साल देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु मुंबई पहुंचते हैं।