मानसून में भूस्खलन से रेलवे को मिलेगी राहत, मध्य रेल ने अपनाई वेटिवर घास की तकनीक, नहीं खिसकेगी मिट्टी

Monsoon Landslides Prevention: मानसून में भूस्खलन और मिट्टी के कटाव से रेल परिचालन बचाने के लिए मध्य रेल ने 5,300 वर्ग मीटर में वेटिवर घास की जैव-अभियांत्रिकी तकनीक अपनाई है।
Central Railway On Monsoon Landslides
वेटिवर घास लगाते मध्य रेलवे के कर्मचारी(फोटो नवभारत)
Published on
Updated on

Central Railway On Monsoon Landslides: मानसून के दौरान घाट खंडों में होने वाले मिट्टी के क्षरण और भूस्खलन से निपटने के लिए मध्य रेल ने अब प्रकृति आधारित समाधान का सहारा लिया है।

रेलवे ने ढलानों और तटबंधों को मजबूत करने के लिए वेटिवर घास आधारित जैव-अभियांत्रिकी तकनीक अपनाई है। दक्षिण-पूर्व घाट खंड में 5,300 वर्ग मीटर क्षेत्र में इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।

ट्रेनों का आवागमन बाधित

भोर घाट (कर्जत–लोनावला) और थाल घाट (कसारा–इगतपुरी) मानसून में तेज बारिश के दौरान मिट्टी का कटाव, सतही जल बहाव, चट्टानों के गिरने और उथले भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील हैं।

इन घटनाओं से पटरियों पर मिट्टी और मलबा आने का खतरा रहता है, जिससे रेल परिचालन प्रभावित हो सकता है। इस मानसून में भी भूस्खलन होने से कई सप्ताह तक ट्रेनों का आवागमन बाधित रहा था।

दो स्थानों पर रोपण

खंडाला-मंकी हिल खंड में अप लाइन की ओर किमी 122/0–122/15 के पास 1,050 वर्ग मीटर, जबकि ठाकुरवाड़ी केबिन-पालसधरी खंड में मिड लाइन की ओर किमी 106/600–106/700 के बीच 4,250 वर्ग मीटर क्षेत्र में वेटिवर (घास का रोपण) लगाया गया है।

Central Railway On Monsoon Landslides
Nashik HC Exam: जूते में छिपा मोबाइल, पेपर मिलते ही Google पर खोजने लगा जवाब; परीक्षा केंद्र में पकड़ा गया

क्या है वेटिवर?

वेटिवर एक प्रकार की घास की प्रजाति है, जिसकी गहरी और सघन जड़ें मिट्टी को मजबूती से बांधती हैं। रेलवे के अनुसार, 12 से 24 महीनों में इसकी जड़ें 3 से 4 मीटर तक गहराई में पहुंच सकती हैं। वहीं, इसकी घनी पत्तियां बारिश के पानी की रफ्तार कम कर मिट्टी के कटाव और गहरी नालियां बनने से रोकने में मदद करती हैं।

मध्य रेलवे को उम्मीद है कि इस तकनीक से ढलानों की स्थिरता बढ़ेगी, पटरियों पर चट्टानों और मलबे के गिरने की घटनाएं कम होंगी तथा मानसून में सुरक्षित और निर्बाध रेल परिचालन में मदद मिलेगी। साथ ही, पारंपरिक ढलान सुरक्षा कार्यों के रखरखाव खर्च में भी कमी आने की संभावना है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com