प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mumbai Local News: एसी लोकल ट्रेन में तीन यात्रियों को नकली यूटीएस जनरेटेड सीजन टिकटों के साथ यात्रा करते हुए पकड़े गए। यह मामला तब सामने आया जब टीसी ने यात्रियों के टिकटों को माई फोल्डर में दिखाए जाने पर संदेह जताया। जब उन्हें यूटीएस ऐप पर टिकट दिखाने के लिए कहा गया, तो वे नहीं खुल पाए। जांच में पता चला कि तीनों टिकटों का यूटीएस नंबर – XOOJHN4569 एक ही था, जबकि हर टिकट का यूटीएस नंबर अलग होना चाहिए था, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि टिकट नकली थे।
बाद में जांच में सामने आया कि ये टिकट एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा बनाए गए थे। पुलिस ने यात्रियों की पहचान नीरज तलरेजा, अथर्व बाग और अदिति मंगलुरकर के रूप में की और उन्हें गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी), कुर्ला को सौंप दिया गया।
मध्य रेलवे ने इस कार्रवाई के बाद चेतावनी जारी की है कि यात्री फर्जी टिकटों का उपयोग करने से बचें, क्योंकि ऐसा करने से उन्हें धोखाधड़ी के आरोपों का सामना करना पड़ सकता है। रेलवे फर्जी टिकट बनाने और उनका उपयोग करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपना रही है।
इन यात्रियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता अधिनियम 2023 (बीएनएस) की धारा 318/2, 336/3, 336/4, 340(1), 340(2) और 3/5 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसके अलावा, ऐसे मामलों में जुर्माना और 7 वर्ष तक का कारावास या दोनों की सजा हो सकती है।
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मध्य रेलवे में फर्जी टिकटिंग का पहला मामला 26 नवंबर को सामने आया था, जब टीसी विशाल नवले ने कल्याण-CSMT एसी लोकल ट्रेन में एक यात्री गुड़िया ओमकार शर्मा से उसका पास दिखाने को कहा। इस पास में जरूरी QR कोड नहीं था, और जब रेलवे हेल्पलाइन पर इसकी जांच की गई तो यह पास एक्सपायर पाया गया था। इसके बाद गुड़िया ने स्वीकार किया कि उसका पति ओमकार शर्मा, जो एक इंजीनियर है, ने एआई तकनीक का इस्तेमाल कर यह नकली पास तैयार किया था। गुड़िया शर्मा एक प्राइवेट बैंक में मैनेजर के रूप में काम करती हैं।