

मुंबई की 42 वर्षीय महिला ने स्वामी इंद्रदेव पर यौन शोषण का आरोप लगाया
काशिमीरा पुलिस स्टेशन में जीरो एफआईआर दर्ज
मामला जांच के लिए उत्तर प्रदेश के वृंदावन पुलिस स्टेशन ट्रांसफर
निरंजनी अखाड़े और अखाड़ा परिषद ने पुलिस रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई की बात कही
Akhada Parishad Statement On Swami Indradev Maharaj: निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर और प्रसिद्ध भागवत कथावाचक स्वामी इंद्रदेव महाराज एक बेहद गंभीर कानूनी और नैतिक विवाद में घिर गए हैं। महाराष्ट्र के मुंबई के मीरा रोड की रहने वाली एक 42 वर्षीय पीड़िता ने संत इंद्रदेव पर धार्मिक आस्था का अनुचित लाभ उठाकर आश्रम में शारीरिक व मानसिक शोषण करने का आरोप लगाया है। इस घटना के बाद महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे संत समाज और सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया है।
पीड़ित महिला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वह जनवरी 2023 में सोशल मीडिया पर स्वामी इंद्रदेव के धार्मिक प्रवचनों को देखकर उनके संपर्क में आई थी। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी और महाराज ने उसे वृंदावन स्थित अपने सेवाधाम आश्रम में बुलाया।
पीड़िता का आरोप है कि 4 नवंबर 2025 को नाड़ी परीक्षण और इलाज के बहाने महाराज ने आश्रम में उसके साथ यौन शोषण किया। इसके बाद भी उन्हें अश्लील वीडियो कॉल करके प्रताड़ित किया जाता रहा। पीड़िता ने यह भी दावा किया कि विरोध करने पर महाराज ने उसे बदनामी और जान से मारने की धमकियां दीं।
इस पूरे मामले में सामाजिक संस्था भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई पीड़िता के समर्थन में आगे आईं। तृप्ति देसाई की अगुवाई में महाराष्ट्र के मीरा-भाईंदर क्षेत्र स्थित काशिमीरा पुलिस स्टेशन में स्वामी इंद्रदेव के खिलाफ बलात्कार और आपराधिक धमकी की विभिन्न धाराओं के तहत जीरो एफआईआर दर्ज कराई गई है। चूंकि अपराध का मुख्य स्थान उत्तर प्रदेश का वृंदावन क्षेत्र है, इसलिए महाराष्ट्र पुलिस ने मामला दर्ज कर केस की डायरी आगे की कानूनी जांच के लिए वृंदावन पुलिस को सौंप दी है।
इस पूरे प्रकरण पर नासिक सिंहस्थ कुंभ के लिए पहुंचे निरंजनी अखाड़े के सचिव और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने नवभारत से विशेष बातचीत करते हुए कहा कि वे इस मामले पर लगातार अपडेट ले रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संत समाज किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्य का समर्थन नहीं करता। जैसे ही पुलिस की आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने आती है, निरंजनी अखाड़ा और अखाड़ा परिषद स्वामी इंद्रदेव के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कठोर कानूनी व संगठनात्मक कार्रवाई करेगा।
वहीं दूसरी ओर, आनंद अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत शंकारानंद सरस्वती ने स्वामी इंद्रदेव के संन्यास पर ही सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि इंद्रदेव ने आनंद अखाड़े से कभी भी औपचारिक संन्यास दीक्षा नहीं ली थी। वह केवल एक कथावाचक थे, जिसके आधार पर आनंद अखाड़े ने उन्हें धर्माचार्य की उपाधि दी थी और बाद में निरंजनी अखाड़े ने उन्हें महामंडलेश्वर बना दिया था।
महंत शंकारानंद ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी वेशभूषा कभी किसी प्रामाणिक संन्यासी जैसी नहीं रही और उन्होंने आज तक किसी भी कुंभ मेले में संन्यासी अखाड़ों के साथ शिविर लगाकर धार्मिक या सेवा कार्य नहीं किया। वे एक 'मनमुखी' (स्वेच्छाचारी) संन्यासी की तरह आचरण करते रहे हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की डिजिटल साक्ष्यों और पीड़ित के बयानों के आधार पर गहन जांच कर रही है।