BMC का बड़ा कदम: बोरीवली की सड़कों के लिए 65 करोड़ का प्रोजेक्ट, गड्ढों से मिलेगी राहत

मुंबई के बोरीवली इलाके में खराब सड़कों को सुधारने के लिए BMC ने 65 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस योजना से ट्रैफिक जाम और गड्ढों की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
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बोरीवली रोड (सौ. सोशल मीडिया )
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BMC  Road Improvement Plan: पश्चिम उपनगर के बोरीवली क्षेत्र में खराब हो चुकी सड़कों के नेटवर्क को सुधारने के लिए मुंबई मनपा ने लगभग 65 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट शुरू किया है।

आर मध्य विभाग के अंतर्गत विभिन्न सड़कों, सीसी पैसज और पूरक नागरिक सुविधाओं के निर्माण को इस परियोजना में शामिल किया गया है। इसके तहत केशव सृष्टि रोड, जांबली गली क्रॉस लेन, शिंपोली क्रॉस रोड, सुंदराबाई गंगाधर रोड तथा प्रभु उपवन क्षेत्र की सड़कों का काम किया जाएगा। केवल डामरीकरण तक सीमित न रहते हुए, सड़कों को अधिक टिकाऊ और नागरिकों के लिए सुरक्षित बनाने पर प्रशासन का विशेष ध्यान है।

BMC देगी सड़कों को मजबूत

परियोजना में मस्टिक डामर (मास्टिक एस्फाल्ट) के माध्यम से सड़कों को मजबूत करना, नए फुटपाथ बनाना, दिव्यांगों के लिए रैंप, वर्षा जल निकासी पाइपलाइन, क्रॉस ड्रेनेज व्यवस्था, रोड मार्किंग और साइन बोर्ड लगाने जैसे कार्य शामिल हैं। कुछ स्थानों पर पेवर ब्लॉक बिछाने और जंक्शन सुधार कार्य भी किए जाएंगे।

5 हजार का लगाया जाएगा जुर्माना

इस परियोजना से बोरीवली की सड़कों की गुणवत्ता में सुधार होगा और बरसात के दौरान ट्रैफिक जाम तथा गड्डों की समस्या से काफी राहत मिलने की उम्मीद है। विभिन्न यूटिलिटी कार्यों के कारण खोदी गई सड़कों की पुनर्स्थापना भी ठेकेदार की जिम्मेदारी होगी। काम पूरा होने के बाद 80 प्रतिशत राशि दी जाएगी, जबकि शेष 20 प्रतिशत राशि दोष दायित्व अवधि में चरणबद्ध तरीके से दी जाएगी।

इस अवधि में यदि सड़कों पर गड्डे, दरारें या अन्य कोई दोष पाया जाता है, तो तुरंत मरम्मत करना अनिवार्य होगा। समय पर मरम्मत न करने पर प्रतिदिन 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। गंभीर खामियां पाए जाने पर संबंधित सड़क का पुनः डामरीकरण करना भी अनिवार्य किया गया है।

कार्य अवधि के दौरान, विशेष रूप से बरसात में, सड़कों को यातायात के लिए उपयुक्त स्थिति में बनाए रखना ठेकेदार के लिए अनिवार्य होगा। गड्ढे भरना, खराब हिस्सों की मरम्मत और दरारें भरने की जिम्मेदारी ठेकेदार की ही होगी, और इसके लिए कोई अतिरिक्त धनराशि नहीं दी जाएगी।

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