ऑपरेशन सिंदूर में अग्निवीर की शहादत पर केंद्र सरकार की चुप्पी से बॉम्बे हाईकोर्ट नाराज, कहा- जवाब दें वरना…
Agniveer Murali Naik Case: ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए अग्निवीर मुरली नाईक की मां की याचिका पर केंद्र के ढुलमुल रवैये से बॉम्बे हाई कोर्ट नाराज है। कोर्ट ने मरणोपरांत लाभों में भेदभाव पर जवाब मांगा है।
- Written By: आकाश मसने
शहीद अग्निवीर मुरली नाईक (सोर्स: सोशल मीडिया)
Bombay High Court On Agniveer Murali Naik Case: बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार के प्रति सख्त नाराजगी व्यक्त की है। मामला ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान शहीद हुए अग्निवीर मुरली नाईक की मां द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अगली सुनवाई तक अपना हलफनामा दाखिल नहीं किया, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
मामला क्या है?
अग्निवीर मुरली नाईक पिछले साल मई में जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से हुई गोलाबारी में शहीद हो गए थे। उनकी मां ज्योतिबाई नाईक ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उनकी मांग है कि अग्निवीरों को भी नियमित सैनिकों के समान ही मरणोपरांत लाभ मिलने चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्र की ‘अग्निपथ योजना’ नियमित सैनिकों और अग्निवीरों के बीच एक मनमाना अंतर पैदा करती है, जो संवैधानिक रूप से गलत है।
बाॅम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी
बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति हितेन वेनेगांवकर की खंडपीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि दिसंबर और जनवरी में नोटिस जारी किए जाने के बावजूद केंद्र ने अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया है। न्यायमूर्ति घुगे ने कहा कि यह याचिका पिछले साल से लंबित है। याचिकाकर्ता ने पिछले साल जुलाई में ही सरकार को पत्र लिखकर ये मुद्दे उठाए थे। अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर 6 मई तक जवाब नहीं आया, तो हम भारी जुर्माना लगाएंगे।
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अदालत ने अब केंद्र को हलफनामा दाखिल करने के लिए 6 मई तक का अंतिम समय दिया है, जबकि मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 18 जून को तय की गई है। साथ ही, महाराष्ट्र सरकार को भी अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।
शहीद की मां का तर्क है कि उनके बेटे ने देश के लिए वही सर्वोच्च बलिदान दिया है जो एक नियमित सैनिक देता है। ऐसे में आर्थिक लाभों और सम्मान में कटौती करना शहीद के अपमान के समान है। यह याचिका अग्निपथ योजना की विसंगतियों पर एक बार फिर नई बहस छेड़ सकती है।
कौन थे मुरली नाईक ?
मुरली नाईक मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे, लेकिन उनके पिता श्रीराम नाईक मुंबई के घाटकोपर इलाके में काम करते थे और वहीं रहते थे। उन्होंने दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करके अपने बेटे मुरली को पढ़ाया-लिखाया। मुरली ने 2022 में भारतीय सेना में शामिल होकर अपने पिता के सपनों को पूरा किया। उनकी ट्रेनिंग नासिक के देवलाली आर्मी कैंप में हुई थी। मुरली की पहली पोस्टिंग असम में हुई, जिसके बाद उन्हें पंजाब में तैनात किया गया। ऑपरेशन सिंदूर से पहले उन्हें जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में तैनात किया गया था।
