बॉम्बे हाईकोर्ट ने सातारा-पालघर के 2 जजों को किया बर्खास्त, एक ने ली रिश्वत तो दूसरा लेता था ड्रग्स
Bombay High Court ने निचली अदालत के दो जजों को बर्खास्त कर दिया है। सतारा के जज धनंजय निकम और पालघर के जज इरफान शेख को रिश्वत और भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया।
- Written By: आकाश मसने
बॉम्बे हाई कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Satara And Palghar Judges Dismissed News: बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सतारा और पालघर के दो निचली अदालत के जजों को भ्रष्टाचार और न्यायिक आचार संहिता का उल्लंघन करने के आरोप में बर्खास्त कर दिया। बर्खास्त जजों में सातारा के एडीशनल सेशन जज धनंजय निकम और पालघर के सिविल जज सीनियर डिवीजन इरफान शेख शामिल हैं। यह निर्णय अनुशासन समिति की जांच के बाद लिया गया।
सतारा के एडीशनल सेशन जज धनंजय निकम पर रिश्वतखोरी का गंभीर आरोप है। एसीबी ने आरोप लगाया कि उन्होंने एक महिला के पिता की हिरासत से जुड़े मामले में अनुकूल आदेश दिलाने के लिए 5 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की।
जनवरी में जज धनंजय निकम ने अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का रुख किया और दावा किया कि वह निर्दोष हैं और उन्हें फंसाया जा रहा है। मार्च में कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।
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क्या है धनंजय निकम का मामला?
दसअसल, मामला एक महिला के पिता की हिरासत से जुड़ा था। निचली अदालत से जमानत नहीं मिलने के बाद महिला ने सतारा सेशन कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी, जिस पर निकम ने सुनवाई की।
सतारा के एडीशनल सेशन जज धनंजय निकम (सोर्स: सोशल मीडिया)
एसीबी की जांच में पाया गया कि मुंबई के किशोर संभाजी खरात और सतारा के आनंद मोहन खरात ने निकम के निर्देश पर महिला से रिश्वत के रूप में 5 लाख रुपये की मांग की।
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एजेंसी ने कहा कि 3 से 9 दिसंबर, 2024 के बीच किए गए जांच में रिश्वत की पुष्टि हुई। निकम, खरात परिवार और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
पालघर के जज पर ड्रग्स के उपयोग का आरोप
दूसरी ओर, पालघर के सिविल जज सीनियर डिवीजन इरफान शेख को एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के दौरान भ्रष्टाचार और जब्त ड्रग्स के उपयोग के आरोप में दोषी पाया गया। शेख के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका अभी लंबित है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रणाली में आचरण और ईमानदारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। दोनों जजों की बर्खास्तगी से न्यायिक भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश गया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों का कदाचार समाज और न्यायपालिका दोनों के लिए खतरनाक है।
