बॉम्बे हाईकोर्ट: मुंबई और ठाणे में कंक्रीट से घुट रहे पेड़ों को मिलेगी नई जिंदगी, BMC और TMC को निर्देश

Bombay High Court De Concretisation Trees Order: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई (BMC) और ठाणे (TMC) नगर निगमों को पेड़ों के तनों के चारों ओर कंक्रीट हटाकर सांस लेने योग्य जगह बनाने का निर्देश दिया है।
Tree trunk encased in concrete and the de-concretization process
कंक्रीट में जकड़े हुए पेड़ के तने और डी-कंक्रीटाइजेशन प्रक्रिया(सोर्स :AI इमेज)
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BMC TMC Tree Protection Mumbai Thane Survey: मुंबई और ठाणे में कंक्रीट के नीचे घुट रहे हजारों पेड़ों को जल्द ही एक नया जीवन मिलने जा रहा है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और ठाणे महानगरपालिका (TMC) को कड़ा निर्देश जारी करते हुए पेड़ों के तनों के आसपास कंक्रीट हटाकर हवा और पानी के लिए पर्याप्त खुला स्थान सुनिश्चित करने को कहा है।

एक विशेष साइट सर्वे रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दोनों शहरों में 60 प्रतिशत से अधिक पेड़ जमीन के नीचे कंक्रीट के कारण घुट रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जहां खुला स्थान बनाना संभव न हो, वहां पेड़ों का दम घोंटने के बजाय वैज्ञानिक विकल्पों पर काम किया जाए।

चौंकाने वाले आंकड़े: ठाणे में 100% और मुंबई में 61% से अधिक पेड़ कंक्रीट में कैद

मुंबई में करीब 29 लाख से अधिक और ठाणे में 7.2 लाख से अधिक पेड़ मौजूद हैं। 12 वार्डों के 1,115 पेड़ों पर किए गए सर्वे में पाया गया कि 684 पेड़ (61.34%) कंक्रीट में बुरी तरह फंसे हैं और उन्हें तुरंत वैज्ञानिक रूप से मुक्त करने की जरूरत है। ठाणे में स्थिति बेहद खतरनाक है, जहां जांचे गए 100 प्रतिशत पेड़ कंक्रीट में जकड़े पाए गए। वहीं मुंबई के H वेस्ट, K वेस्ट, R सेंट्रल और T वार्ड में भी जांचे गए सभी पेड़ हार्डस्केप (पेवर ब्लॉक/कंक्रीट) के नीचे दबे मिले।

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बाहर से हरे-भरे, लेकिन अंदर से सड़ रहे हैं तने

विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन पेड़ों का ऊपरी हिस्सा (कैनोपी) हरा-भरा और घना दिखता है, वे भी अंदर से सड़ रहे होते हैं। तनों के पास जमा कंक्रीट जड़ों तक ऑक्सीजन और पानी नहीं पहुंचने देता, जिससे नमी फंसकर फंगल अटैक (Fungal Attack) का कारण बनती है। इससे पेड़ की जड़ें अंदर ही अंदर सड़ जाती हैं और तेज हवा चलने पर ये पेड़ बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक गिर जाते हैं।

GIS मैपिंग और सिंगल नोडल अथॉरिटी का प्रस्ताव

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि सिर्फ पेवर ब्लॉक हटाना काफी नहीं है, बल्कि जड़ों के ऊपरी हिस्से (Root Flare) को पूरी तरह साफ करके मिट्टी को सांस लेने योग्य बनाना होगा। अदालत के हस्तक्षेप के बाद अब एक 'नोडल अथॉरिटी' (Tree Authority) गठित करने का प्रस्ताव है। योजना के तहत:

  • अति-जोखिम वाले पेड़ों को 6 महीने के भीतर कंक्रीट से मुक्त और स्थिर किया जाएगा।

  • फुटपाथ या सड़क चौड़ीकरण जैसे किसी भी सिविल कार्य को तब तक मंजूरी नहीं मिलेगी, जब तक कि वृक्ष संरक्षण प्रमाण-पत्र न हो।

  • इंजीनियरों और ठेकेदारों को अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा नागरिकों के लिए प्रगति ट्रैक करने हेतु GIS आधारित डिजिटल ट्री इन्वेंट्री बनाई जाएगी।

याचिकाकर्ता रोहित जोशी ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि शहर की प्रगति केवल बनाई गई इमारतों से नहीं, बल्कि बचाए गए प्राकृतिक पर्यावरण से मापी जानी चाहिए। अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट्स और आर्बोरिस्ट (वृक्ष विशेषज्ञों) को शामिल करने का आदेश बेहद महत्वपूर्ण कदम है।

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