Bombay High Court की फटकार के बाद हरकत में बीएमसी, बड़े बिल्डरों को थमाए Stop Work नोटिस

Maharashtra News: बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद बीएमसी ने वायु प्रदूषण पर कड़ा रुख अपनाया है। नियमों के उल्लंघन पर बड़े बिल्डरों समेत कई निर्माण स्थलों को सीधे स्टॉप वर्क नोटिस जारी किए गए।
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बीएमसी (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mumbai News In Hindi: बीते दिनों बॉम्बे हाई कोर्ट ने वायु प्रदूषण मुद्दे को लेकर बीएमसी आयुक्त को खूब खरी-खोटी सुनाया। कोर्ट ने आयुक्त की सैलरी रोक देने की बात तक कह डाली।

बीएमसी की छवि किरकिरी होते देख प्रशासन हरकत में आया और सरकारी निर्माण स्थलों के साथ-साथ प्राइवेट निर्माण स्थलों को वार्निंग न देकर सीधा स्टॉप वर्क नोटिस पकड़ा दिया, जिससे बिल्डरों व ठेकेदारों के बीच हड़कंप मच गया। इस कार्रवाई में रहेजा ग्रुप, टाटा प्रोजेक्ट व कल्पतरु जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

बीएमसी के पर्यावरण विभाग और संबंधित वार्ड अधिकारियों द्वारा किए गए संयुक्त निरीक्षण में यह सामने आया कि शहर में मौजूद अनेक निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए आवश्यक उपाय नहीं किए गए थे। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई जगहों पर निर्माण सामग्री खुले में रखी गई थी, पानी का छिड़काव नहीं हो रहा था और साइट के चारों ओर अनिवार्य ग्रीन नेट अथवा कवर शीट भी नहीं लगाई गई थी।

प्रदूषण के बढ़ते स्तर के लिए मानव-जनित कारण जिम्मेदार है जिनमें वाहन उत्सर्जन, धूल का उड़ना और निर्माण कार्य प्रमुख है। मुंबई में वाहनों की घनत्व सबसे अधिक है और शहर में प्रदूषण का मुख्य कारण वाहन उत्सर्जन को माना गया है। इसके अलावा, निजी और सार्वजनिक परियोजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य भी चल रहे है, जिससे शहर के एक्यूआई स्तर में गिरावट आई है। बीएमसी अधिकारी

मुंबई में पीएम 10 और 2.5 की हुई बढ़ोतरी

  • इसके कारण आसपास के इलाकों में भारी मात्रा में धूल फैल रही थी। इनमें ऊंची इमारतों, पुनर्विकास योजनाओं और बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल है। बीएमसी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ये सभी निर्माण स्थल महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) और बीएमसी द्वारा तय किए गए वायु प्रदूषण नियंत्रण दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रहे थे।
  • बीएमसी ने कुछ निजी आर्किटेक्टर को भी नोटिस भेजा है जो वायु प्रदूषण मानकों का पालन करने में विफल रहे हैं। बीएमसी का कहना है कि निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल मुंबई में पीएम-10 और पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कणों का स्तर तेजी से बढ़ा रही है।
  • इसका सीधा असर नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और दमा या सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति गंभीर बनती जा रही है।

जनवरी में 18 दिन अस्वस्थ हवा, 6 दिन ही संतोषजनक रहा

सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी से 24 जनवरी के बीच मुंबई में कुल 18 दिन अस्वस्थ एक्यूआई दर्ज किया गया है। इस अवधि के दौरान एक्यूआई का स्तर 120 से 150 के बीच रहा, जो 'मध्यम' श्रेणी में आता है और इसे विशेष रूप से बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों जैसे संवेदनशील वर्गों के लिए अस्वस्थ माना जाता है। आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि 24 दिनों में 6 दिन ही संतोषजनक एक्यूआई दर्ज किया गया।

अगर नियमों का पालन नहीं, तो काम भी नहीं

बीएमसी ने साफ किया है कि जिन निर्माण स्थलों को स्टॉप वर्क नोटिस दिया गया है, वहां तब तक काम शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक सभी प्रदूषण नियंत्रण उपाय पूरी तरह लागू नहीं किए जाते। नियमों का दोबारा उल्लंघन पाए जाने पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

प्रशासन ने भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए नियमित और आकस्मिक निरीक्षण बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए विशेष निगरानी दल गठित किए गए हैं, जो बिना पूर्व सूचना निर्माण स्थलों की जांच करेंगे।

बीएमसी ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यदि कहीं निर्माण कार्य से अत्यधिक धूल या वायु प्रदूषण फैलता दिखाई दे, तो इसकी शिकायत तुरंत संबंधित वार्ड कार्यालय या बीएमसी की हेल्पलाइन नंबर 1916 पर दर्ज कराए।

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