गारगई डैम (सौ. सोशल मीडिया )
Gargai Dam Project Mumbai Water Supply: बीएमसी की स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) ने पालघर जिला में प्रस्तावित गारगई डैम परियोजना को मंजूरी देने से इंकार कर दिया। समिति ने परियोजना की बढ़ती लागत, पर्यावरणीय प्रभाव और प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास को लेकर चिंता जताई।
विभिन्न दलों के समिति सदस्यों ने टेंडर प्रक्रिया और परियोजना की बढ़ती लागत पर सवाल उठाए। इसके बाद मतदान के पश्चात स्थायी समिति के अध्यक्ष और भाजपा नगरसेवक प्रभाकर शिंदे ने प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए प्रशासन के पास वापस भेज दिया।
शिंदे ने कहा कि स्थायी समिति का दायित्व बीएमसी के खर्चों पर निगरानी रखना है। इसलिए प्रस्ताव को वापस भेजा गया है ताकि अगली बार इसे पेश किए जाने पर सदस्यों द्वारा उठाए गए सभी सवालों का प्रशासन जवाब दे सके। उन्होंने कहा कि मुंबई की जल आपूर्ति बढ़ाने के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण परियोजना है, इसलिए इसे पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ मंजूरी मिलनी चाहिए।
बीएमसी दस्तावेजों के अनुसार परियोजना की मूल अनुमानित लागत 3,006 करोड़ रुपये थी, पिछले वर्ष दिसंबर में टेंडर जारी किए गए थे, जिनमें सौमा एंटरप्राइजेज लिमिटेड और हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी ने अनुमान से अधिक बोली लगाई। सोमा ने 3,334 करोड़ रुपये (लगभग 10.9% अधिक) और एचसीसी ने 3,496 करोड़ रुपये (लगभग 16.28% अधिक) की बोली लगाई थी।
बाद में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के साथ बातचीत के बाद कार्यादेश। अनुमानित लागत से लगभग 8.9 प्रतिशत कम पर जारी किया गया। प्रस्तावित परियोजना के तहत गारगई नदी पर 69 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाएगा और 2.2 मीटर व्यास की 1.6 किलोमीटर लंबी जल सुरंग तैयार की जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रभावित ग्रामीणों का पुनर्वास परियोजना स्थल से 21 किलोमीटर के दायरे में एक नए टाउनशिप में किया जाएगा, जहां सड़क, स्वच्छता, पेयजल और डाक सेवाओं जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना को वन्यजीव बोर्ड सहित कई सरकारी एजेंसियों की जांच से गुजरना पड़ा है। गारगई बांध परियोजना से शुरुआती चरण में मुंबई की जल आपूर्ति में 450 मिलियन लीटर प्रतिदिन की वृद्धि होने की उम्मीद है। वर्ष 2050 तक चार बांधों के नेटवर्क के तहत यह आपूर्ति बढ़कर 2,800 एमएलडी तक पहुंच सकती है।
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वर्तमान में मुंबई को रोजाना लगभग 4,200 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है, जबकि बीएमसी करीब 3.850 एमएलडी पानी ही उपलब्ध करा पा रही है। सभी मंजूरियां मिलने और निर्माण कार्य शुरू होने के बाद परियोजना को पूरा होने में लगभग छह वर्ष लगने की संभावना है। यह बांध परियोजना करीब एक दशक पहले प्रस्तावित की गई थी और बीएमसी इसे 2025 तक चालू करने की योजना बना रही थी। लेकिन 2019 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाड़ी सरकार ने पर्यावरणीय चिंताओं का हवाला देते हुए इसे अस्थायी रूप से रोक दिया था।