Mumbai: जोगेश्वरी पूर्व का वार्ड 78 बना हाई-वोल्टेज, मुन्ना झिंगाडा की दो बहनें आमने-सामने
BMC Election 2026 में जोगेश्वरी पूर्व का वार्ड 78 सुर्खियों में है। कुख्यात मुन्ना झिंगाडा की दो बहनें कांग्रेस और सपा से आमने-सामने हैं, जिससे अपराध और राजनीति पर बहस तेज हो गई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुंबई न्यूज (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: बीएमसी चुनाव में इस बार जोगेश्वरी पूर्व का वार्ड नंबर 78 राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही कारणों से चर्चा के केंद्र में आ गया है।
संवेदनशील ‘बांद्रा प्लॉट’ इलाके में आने वाले इस वार्ड से कुख्यात अपराधी मुन्ना शिंगाडा की दोनों बहनें अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं।
एक ही परिवार की दो महिलाएं, आमने-सामने हैं। पूरे इलाके की राजनीति को हाई-वोल्टेज बना दिया है। मुन्ना झिंगाडा का नाम टी- सीरीज के मालिक गुलशन कुमार हत्याकांड से जुड़ चुका है। वहल अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी सहयोगी छोटा शकील का नजदीकी माना जाता रहा है। ऐसे व्यक्ति के परिवार की खुली राजनीतिक एंट्री ने एक बार फिर मुंबई में अपराध और राजनीति के रिश्ते पर बहस तेज कर दी है।
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एक बहन कांग्रेस से, तो दूसरी सपा से मैदान में
शुरुआत में कांग्रेस की ओर से मुन्ना झिंगाडा की सगी बहन गुलफाम को टिकट देने की तैयारी थी। बताया जाता है कि नाम लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन पार्टी के भीतर विरोध और असहजता के चलते आखिरी समय में फैसला बदला गया।
इसके बाद कांग्रेस ने मुन्ना झिंगाडा की ममेरी बहन शबाना को वार्ड 78 से अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। कांग्रेस के इस फैसले के बाद सियासी समीकरण और दिलचस्प हो गए। समाजवादी पार्टी ने मौके को भुनाते हुए मुन्ना झिंगाडा की सगी बहन गुलफाम को टिकट दे दिया।
इस तरह एक ही परिवार की दो महिलाएं अब दो अलग समाजवादी पार्टी अलग दलों के झंडे तले आमने-सामने हैं। स्थानीय स्तर पर इसे “रिश्तों की नहीं, सियासत की लड़ाई बताया जा रहा है। जोगेश्वरी पूर्व का ‘बांद्रा प्लॉट’ इलाका पहले से ही संवेदनशील माना जाता है।
अतीत में यहां गैंगवार, अवैध गतिविधियों और अपराध की कई घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। ऐसे इलाके में यह चुनाव प्रशासन और पुलिस के लिए भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
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चुनाव में दोनों बहनों को लेकर यहां के नागरिकों की अलग-अलग राय
- स्थानीय मतदाताओं के बीच इस मुकाबले को लेकर राय घंटी हुई है। कुछ लोग इसे लोकतंत्र में हर नागरिक के चुनाव लड़ने के अधिकार से जोड़कर देख रहे है, जबकि कई मतदाताओं का कहना है कि आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े नामों की परछाई राजनीति पर नहीं पड़नी चाहिए।
- विपक्षी दल इरा मुद्दे की जोर शोर से उठाने की तैयारी में है, राजनीतिक विश्लेषकों कर मानना है कि वार्ड 78 का चुनाव केवल एक नगरसेवक की जीत-हार तक सीमित नहीं रहेगा, इसका संदेश दूर तक जाएगा।
- यह मुकाबला तय करेगा कि मुंबई की नगर राजनीति में छवि, परिवार और राजनीतिक रणनीति में से किसका पलड़ा भारी रहता है।
