

Mumbai Medical Stores Discount: मुंबई के लाखों मरीजों को सस्ती और आसानी से उपलब्ध दवाओं की सुविधा देने के लिए बीएमसी ने अपने अस्पतालों में 'सस्ती दवा मिशन' की शुरुआत कर दी है। इस योजना के तहत मनपा के विभिन्न अस्पताल परिसरों में 50 जेनेरिक दवा दुकानें खोली जाएंगी, जहां मरीजों और उनके परिजनों को चौबीसों घंटे कम कीमत पर दवाएं मिल सकेंगी।
इसकी शुरुआत पश्चिम उपनगर स्थित कूपर अस्पताल से हो चुकी है। खास बात यह है कि जेनेरिक दवाओं के साथ-साथ ब्रांडेड दवाएं भी पांच प्रतिशत की छूट पर उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है।
बीएमसी अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में इस सुविधा का विस्तार उपनगरीय, प्रमुख, विशिष्ट और सुपर-स्पेशलिटी अस्पतालों तक किया जाएगा। योजना का मुख्य उद्देश्य मनपा अस्पतालों में उपचार के लिए आने वाले गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना है। यह पहल केंद्र सरकार की जन औषधि योजना के अनुरूप है, जिसके तहत लोगों को रियायती दरों पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक अस्पताल में लगभग 150 वर्ग फुट जगह दवा दुकान के लिए आवंटित की जाएगी। यह स्थान एनएसीओएफ को किराए पर दिया जाएगा, जहां से मरीजों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
अधिकारियों के मुताबिक मरीजों और उनके परिजनों को किसी भी समय दवाएं उपलब्ध कराने के लिए ये दुकाने चौबीसों घंटे संचालित होंगी। साथ ही इन स्टोर्स को राष्ट्रीय औषधि मूल्य प्राधिकरण और खाद्य व औषधि प्रशासन द्वारा निर्धारित सभी नियमों और मानकों का पालन करना होगा बीएमसी द्वारा तय शर्तों के अनुसार, प्रत्येक दवा दुकान में राज्य फार्मेसी परिषद से मान्यता प्राप्त कम से कम तीन पंजीकृत फार्मासिस्ट नियुक्त करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा दुकानों को बाहरी स्रोतों से खरीदी गई सभी दवाओं का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एफडीए के मानकों के अनुरूप तापमान नियन्त्रित भंडारण सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होगी।
अधिकारियों ने बताया कि इन स्टोर्स पर केवल जेनेरिक दवाएं ही नहीं, बल्कि ब्रांडेड दवाएं भी उपलब्ध होंगी। ब्रांडेड दवाओं पर मरीजों को पांच प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी, जिससे उपचार का खर्च और कम हो सकेगा। मुंबई बीएमसी का मानना है कि इस पहल से मनपा अस्पतालों पर निर्भर लाखों मरीजों को सीधा लाभमिलेगा। दवाओं पर होने वाला खर्च कम होगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में सस्ती तथा गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।