मुंबई एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम (सोर्स: सोशल मीडिया)
BMC Launches MANAS Air Quality Monitoring System: बीएमसी शहर के सबसे अधिक प्रदूषित इलाकों में वायु गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए मुंबई एयर नेटवर्क फॉर एडवांस साइंसेज (मानस) नामक एक हाइपरलोकल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू करने जा रही है।
इसके तहत 75 नए सेंसर लगाए जाएंगे, जिनका उद्देश्य शहर के प्रदूषण स्तर की बारीकी से निगरानी करना है। यह प्रणाली आईआईटी कानपुर ने विकसित की है। इसके शुरू होने से मुंबई के मौजूदा एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क को काफी मजबूती मिलेगी और अधिकारियों को प्रदूषण के स्रोतों की अधिक सटीक पहचान करने में मदद मिलेगी।
फिलहाल मुंबई के 603 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 28 मॉनिटरिंग स्थापित है, यानी लगभग हर 21 वर्ग किलोमीटर पर एक मॉनिटरिंग स्टेशन है. मानस के तहत 75 नए सेंसर लगने के बाद यह नेटवर्क काफी धना हो जाएगा और लगभग हर 5 से 6 वर्ग किलोमीटर पर एक सेंसर या स्टेशन उपलब्ध होगा।
इससे मॉनिटरिंग क्षमता करीब चार गुना बढ़ जाएगी। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक सचिदानंद त्रिपाठी ने बताया कि पहले चरण में उन क्षेत्रों में 75 सेंसर लगाए जाएंगे, जहां लगातार असुरक्षित वायु गुणवत्ता दर्ज किया गया है।
इसका उद्देश्य प्रदूषण के पैटर्न से जुड़ा सूक्ष्म और विस्तृत डेटा प्राप्त करना है। उन्होंने बताया कि सेंसर से मिलने वाले डेटा को सैटेलाइट इमेजरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर उन्हें कम करने की रणनीति बनाई जा सके। डॉ. त्रिपाठी केंद्र सरकार की संचालन समिति के सदस्य भी हैं।
केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई के कई इलाकों में लगातार खराब वायु गुणवत्ता दर्ज की गई है। इस साल 1 जनवरी से 12 मार्च के बीच देवनार और अंधेरी पूर्व स्थित चकाला में 54 दिन तक अस्वस्थ वायु गुणवत्ता दर्ज की गई, जबकि मालाड में 53 दिन ऐसे रहे। वहीं कोलाबा और बीकेसी में क्रमशः 50 और 45 दिन खराब हवा दर्ज की गई। बीएमसी अधिकारियों के अनुसार इन इलाकों में मॉनिटरिंग को मजबूत करना प्राथमिकता होगी।
उदाहरण के तौर पर देवनार में कचरा डंपिंग ग्राउंड होने के कारण अक्सर कचरा जलाने की घटनाएं होती है, जबकि बीकेसी और कोलाबा जैसे इलाकों में भारी ट्रैफिक के कारण प्रदूषण बढ़ता है। बीएमसी अगले महीने 15 दिनों का अध्ययन करेगी, जिसके आधार पर सेंसर लगाने के अंतिम स्थान तय किए जाएंगे, सेंसर को छेड़छाड़ से बचाने के लिए इन्हें बीएमसी और सरकारी संपत्तियों पर लगाया जाएगा।
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अधिकारियों के मुताबिक यह मॉनिटरिंग सिस्टम मई तक चालू होने की उम्मीद है। इसके डेटा को दिखाने के लिए एक सार्वजनिक डैशबोर्ड 2026 के मध्य तक तैयार किया जाएगा और 2027 की शुरुआत तक इसे आम जनता के लिए उपलब्ध कराने की योजना है. इस तरह के हाइपरलोकल सेंसर नेटवर्क पहले ही बिहार और यूपी में लागू किए जा चुके हैं, जहां क्रमशः लगभग 540 और 835 सेंसर लगाए गए हैं।